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बीजापुर। बीते गुरुवार को फागुन पर्व के समापन के बाद माँ भद्रकाली की पवित्र छत्र अपने धाम लौट आई। इस अवसर पर नगर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। माता के आगमन पर श्रद्धालुओं ने जगह-जगह सड़क पर फूल बिछाकर और पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया।
जैसे ही माँ भद्रकाली की छत्र नगर में पहुंची, भक्तों के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। पूरे रास्ते श्रद्धालु माता के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। कई स्थानों पर लोगों ने फूलों की सेज बिछाई और भक्ति गीतों के साथ माता का स्वागत किया। इससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।

हर साल की तरह इस बार भी फागुन पर्व के दौरान माताओं को दंतेवाड़ा के मेले में ले जाया गया था। इस यात्रा में छह मंदिरों की माताएं शामिल रहीं। इनमें भद्रकाली माता के साथ इलमिड़ी की कनका दुर्गा और नवदुर्गा माता, जैतालुर की चंडीका माता, एरमनार की सारक्का-समक्का माता और तोयनार की भवानी माता शामिल थीं।
कार्यक्रम में संत स्वामी प्रेम स्वरूपानंद सरस्वती, सेवानिवृत्त शिक्षक रवि शंकर शुक्ला, भद्रकाली माता के प्रमुख पुजारी लक्ष्मैया सूरे और अल्लैमा कुरसम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद रहे। वहीं मांझीगुड़ा मंदिर से पुजारी कामेश्वर, इलमिड़ी से चंदु पुनेम, जैतालुर के प्रमुख पुजारी अक्षय कोरसा, तोयनार के पुजारी विनोद गावड़े और एरमनार के प्रमुख पुजारी शेखराज भी उपस्थित रहे।
जानकारी के अनुसार 28 फरवरी को सुबह करीब 9 बजे मंदिरों में पूजा-अर्चना के बाद माताओं का प्रस्थान दंतेवाड़ा मेले के लिए हुआ था। वहां मुख्य पुजारी जिया बाबा ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। इसके बाद 5 मार्च को दोपहर करीब 12 बजे पूजा के बाद छत्र अपने धाम लौट आई।

छत्र के नगर पहुंचने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े। लोगों ने माता से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। शाम तक पूरे नगर में जयकारों और भक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती रही।
