परिजनों का र्दद किसिने नहीं सुना चिल्लाते रहे बार बार दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बस्तर की बड़ी लापरवाही उजागर – परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, सवाल उठे व्यवस्था पर
दैनिक मूक पत्रिका बस्तर -स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का एक और दर्दनाक उदाहरण सामने आया है। ग्राम खोटलापाल निवासी 60 वर्षीय रामशिला की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बस्तर में तड़प-तड़पकर मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्स पूरी रात सोते रहे, जबकि मरीज दर्द से कराहती रही।
मृतका के पुत्र नारायण भारद्वाज ने बताया कि शनिवार को उनकी मां को तेज दर्द होने पर बस्तर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने मलेरिया सहित अन्य जांचें कराने के निर्देश दिए थे।
लेकिन शनिवार की रात करीब 3 बजे उनकी मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई। नारायण ने कई बार ड्यूटी रूम में जाकर डॉक्टर और नर्स को आवाज दी, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा —
“मैं बार-बार दरवाजा खटखटाता रहा, मां दर्द से तड़पती रही, लेकिन कोई देखने तक नहीं आया। सुबह 4 बजे मेरी मां ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।”
सुबह लगभग 6 बजे जब परिजन को जानकारी दी, तब डॉक्टर और नर्स पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
सुबह 7 बजे जब मीडिया टीम अस्पताल पहुंची तक बॉडी बेड में ही रहा इस दौरान ड्यूटीरत चिकिस्क डॉ. सतीश ने बताया कि मरीज को शनिवार को भर्ती किया गया था और रविवार को उसकी मलेरिया सहित अन्य जांचें की जानी थीं।
लापरवाही आखिर क्यों?
सवाल यह उठता है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैसे सरकारी अस्पतालों में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्स मरीज की पुकार सुनकर भी निष्क्रिय क्यों रहते हैं?
क्या यह रात की ड्यूटी केवल औपचारिकता बनकर रह गई है?
परिजनों का कहना है कि अगर समय पर चिकित्सा सहायता मिल जाती तो रामशिला की जान बचाई जा सकती थी। यह घटना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनहीनता और विफलता को उजागर करती है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अस्पताल में रात के समय अक्सर कर्मचारी अनुपस्थित रहते हैं, जिससे आपातकालीन मरीजों को भारी परेशानी होती है।
⚖️ अब जनता पूछ रही है – जवाबदेही कौन तय करेगा?
क्या इस लापरवाही पर डॉक्टर और नर्स के खिलाफ कार्यवाही होगी?
क्या स्वास्थ्य विभाग ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था लागू करेगा?
या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
वर्शन
खण्ड़ चिकित्सा अधिकारी
एन एस नाग
आप लोगों के माध्यम से ही यह मामला संज्ञान में आया है जांच की जावेगी
🕯️ “मां को बचाया जा सकता था… बस कोई सुन लेता।”
– नारायण भारद्वाज, पुत्र (मृतका रमशिला)
