दैनिक मूक पत्रिका बेमेतरा – इंडियन पब्लिक स्कूल में बीते मंगलवार को श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी शताब्दी को समर्पित एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर छत्तीसगढ़ सिख समाज जिला बेमेतरा के अध्यक्ष हरदीप सिंह राजा छाबड़ा, संयुक्त धर्म प्रचार कमेटी एवं गुरु गोबिंद सिंह स्टडी सर्कल बेमेतरा के जिला अध्यक्ष हरजीत सिंह खनूजा सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान प्रीतम हुरा, पप्पी सिंह अजमानी, वरिंदर सिंह सलूजा, सुरेंद्र सिंह, सोनू गुंबर, सुहावी कौर खनूजा, धनवंती कौर तथा वरिष्ठ समाजसेविका गुरप्रीत कौर शैली छाबड़ा ने 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को गुरु तेग बहादुर साहिब जी के अद्वितीय बलिदान का इतिहास भावपूर्ण रूप से बताया।
समारोह को संबोधित करते हुए हरदीप सिंह राजा छाबड़ा ने कहा कि हिंदू धर्म और मानवता की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने अपने साथियों — भाई सती दास जी, भाई मति दास जी और भाई दयाल दास जी — के साथ सर्वोच्च बलिदान देकर इतिहास में अमर मिसाल स्थापित की। उन्होंने बताया कि यह शहीदी पूरे विश्व को धर्म, सिद्धांत और न्याय के लिए खड़े होने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने भावनात्मक स्वर में यह भी कहा कि इंडियन पब्लिक स्कूल ही वह स्थान है जहाँ से उनकी शिक्षा की नींव पड़ी थी। इसी प्रकार, गुरप्रीत कौर शैली छाबड़ा भी इसी विद्यालय की पूर्व छात्रा रहीं और आज धर्म प्रचार के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रही हैं।
विद्यालय के मुख्य प्रधान पाठक रामकुमार भारती ने दोनों पूर्व छात्रों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय के लिए यह बड़े सम्मान की बात है कि इसके छात्र समाज और धर्म के क्षेत्र में प्रेरणादायी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ सिख समाज का आभार जताते हुए गुरु तेग बहादुर साहिब के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
गुरप्रीत कौर शैली छाबड़ा ने अपने संबोधन में पंडित कृपाराम और कश्मीरी पंडितों द्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब जी से की गई गुहार का उल्लेख करते हुए बताया कि औरंगज़ेब के अत्याचारों से धर्म की रक्षा हेतु गुरु साहिब ने अपना शीश समर्पित कर मानवता, तिलक और जनेऊ की रक्षा की। इसी कारण उन्हें “हिंद की चादर” कहा जाता है।
कार्यक्रम में 200 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और गुरु तेग बहादुर साहिब जी के अद्वितीय शहीदी दिवस को नमन किया। पूरा विद्यालय श्रद्धा, सम्मान और प्रेरणा के वातावरण से भाव-विभोर हो उठा।
