दैनिक मूक पत्रिका नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में कई ऐसे पेड़-पौधे मिलते हैं, जिनका उपयोग केवल जंगल और गांवों की परंपराओं तक सीमित है लेकिन उनकी उपयोगिता बेहद चौंकाने वाली है। इन्हीं में से एक औषधीय पौधा है मदार, जिसे आम भाषा में आक या अकौआ कहा जाता है। यह पौधा अक्सर घरों के आसपास, खेतों की मेढ़ पर और बंजर जमीनों पर आसानी से उग आता है लेकिन इसके औषधीय गुणों के बारे में कम लोग जानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मदार के फूल भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं।
सीधी के यूनानी मेडिकल ऑफिसर डॉ जुबैर अली ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि मदार के पत्ते, जड़ और फूल औषधि स्वरूप उपयोग में लाए जाते हैं। इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-फंगल गुण त्वचा रोगों, घाव और सूजन में तेजी से राहत देते हैं। यह पौधा ज्वर, पाचन संबंधी परेशानी और श्वसन रोगों में भी बेहद उपयोगी माना जाता है। आयुर्वेद में यह विशेष रूप से वात और कफ दोष को संतुलित करने में सहायक है।
औषधीय गुणों का खजाना मदार का पौधा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ आरपी परौहा ने लोकल 18 से कहा कि मदार केवल धार्मिक महत्व वाला पौधा नहीं बल्कि औषधीय गुणों का खजाना है। इसके रस में प्राकृतिक दर्दनाशक गुण होते हैं, जो फोड़े-फुंसियों, एक्जिमा, खुजली और सूजन में कारगर हैं। पाचन तंत्र कमजोर होने पर, पेट दर्द, कब्ज या अपच जैसी समस्या में मदार का नियंत्रित उपयोग काफी राहत देता है।
डॉ परौहा के अनुसार, यह पौधा अस्थमा, पुरानी खांसी और सांस की समस्याओं में भी लाभकारी है। इसके नियमित लेकिन नियंत्रित उपयोग से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है और सामान्य संक्रमणों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। हालांकि चेतावनी के तौर पर उन्होंने कहा कि मदार जहरीला पौधा है, इसलिए इसका सेवन या उपयोग विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है। यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं। इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें। दैनिक मूक पत्रिका किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।
