दैनिक मूक पत्रिका रायपुर – सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता उपेंद्र जगत ने छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने में हो रही गंभीर प्रशासनिक जटिलताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए देश के गृह मंत्री अमित शाह से त्वरित हस्तक्षेप की माँग की है। उन्होंने कहा कि घासी-घसिया, गाड़ा, महार, मोची सहित कई अनुसूचित जाति समुदायों के हजारों विद्यार्थी जाति प्रमाण पत्र के अभाव में अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित होते जा रहे हैं।

उपेंद्र जगत ने बताया कि प्रदेश के कई जिलों में अधिकारियों द्वारा जाति प्रमाण पत्र के लिए 1950 के पूर्व के दस्तावेज़ अनिवार्य बताए जा रहे हैं, जो व्यावहारिक रूप से उपलब्ध होना लगभग असंभव है। उन्होंने इसे पूर्णतः अव्यावहारिक, असंवैधानिक और सामाजिक न्याय के विरुद्ध बताया।
उन्होंने कहा कि शासन द्वारा 2018 में डॉ. रमन सिंह सरकार और बाद में भूपेश बघेल सरकार द्वारा जाति प्रमाण पत्र प्रक्रिया को सरल करने के निर्देश जारी किए गए थे, जिनके आधार पर नगर निगम और पंचायत स्तर पर प्रमाण पत्र भी बनाए गए। इसके बावजूद अधिकारियों की कथित लापरवाही और हठधर्मिता के कारण आदेशों का पालन नहीं हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, केवल नगर पालिक निगम में ही लगभग 6000 आवेदन लंबित पड़े हुए हैं।
उपेंद्र जगत ने उत्तराखंड राज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कट-ऑफ डेट 1950 के बजाय राज्य गठन वर्ष 2000 को मान्य किया गया है। चूँकि छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड दोनों ही राज्य वर्ष 2000 में बने थे, इसलिए छत्तीसगढ़ में भी यही व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब देशभर में एक राष्ट्र, एक विधान और समान नागरिक संहिता (UCC) की बात प्रबल रूप से उठ रही है, तो छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में आज भी पुरानी और अव्यवहारिक शर्तों पर जाति प्रमाण पत्र निर्भर होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उपेंद्र जगत ने गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया है कि—
जाति प्रमाण पत्र के लिए 1950 पूर्व की दस्तावेज़ी अनिवार्यता को तुरंत समाप्त किया जाए
राज्य शासन द्वारा जारी सरलीकरण आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जाए
संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए
अनुसूचित जाति वर्ग के छात्र-छात्राओं को बिना बाधा उनका अधिकार मिले
उन्होंने कहा कि इस निर्णय से लाखों SC/ST युवाओं के भविष्य को नई दिशा मिलेगी और सामाजिक न्याय की भावना सुदृढ़ होगी।
— उपेंद्र जगत
अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता
