मूक पत्रिका रायपुर – जमीन कारोबारी और समाजसेवी बसंत अग्रवाल ने वामपंथी विचारधारा से जुड़े संगठनों और व्यक्तियों पर उनकी छवि खराब करने के लिए संगठित साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह हमला वैचारिक असहमति नहीं, बल्कि योजनाबद्ध चरित्र हनन का अभियान है।
बसंत अग्रवाल के अनुसार, बीते कुछ समय से सोशल मीडिया और चुनिंदा वैचारिक मंचों पर उनके विचारों को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्यहीन आरोप, आधे-अधूरे उद्धरण और दुर्भावनापूर्ण पोस्ट के जरिए उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
अग्रवाल ने दो टूक शब्दों में कहा, “जब तर्क खत्म हो जाते हैं, तब वामपंथी गिरोह बदनामी का सहारा लेता है। यह साजिश मेरी आवाज़ को दबाने और राष्ट्रवादी विचारों को हाशिए पर डालने की कोशिश है।” उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि असहमति का जवाब बहस से दिया जाना चाहिए, न कि चरित्र हनन और झूठे प्रचार से। अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव में अपने विचारों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने अपने समर्थकों और पाठकों से अपील की कि वे इस दुष्प्रचार को पहचानें और तथ्यों के साथ इसका जवाब दें। साथ ही चेतावनी दी कि इस तरह के अभियान लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करते हैं। इस पूरे मामले में जिन वामपंथी समूहों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
