दैनिक मूक पत्रिका सुकमा – नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कार्यरत शिक्षा दूतों की समस्याओं और उनके योगदान को लेकर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश कवासी ने बीते शुक्रवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम जिला कलेक्टर सुकमा को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में हरीश कवासी ने मांग की है कि नक्सल हिंसा में मारे गए शिक्षा दूतों के परिजनों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता दी जाए तथा दिवंगत शिक्षा दूतों को शहीद का दर्जा प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि सुकमा जिले के अंदरूनी इलाकों में लंबे समय से बंद पड़ी स्कूलों को फिर से शुरू करने में शिक्षा दूतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कवासी ने बताया कि कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हुए शिक्षा दूतों ने शिक्षा की अलख जगाई है। कई बार उन्हें महीनों तक मानदेय नहीं मिला, फिर भी उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठा से किया। यहां तक कि कुछ शिक्षा दूतों की नक्सली हिंसा में जान भी चली गई, लेकिन शेष शिक्षा दूत अब भी जोखिम उठाकर बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं।
उन्होंने शासन-प्रशासन से निवेदन किया कि दिवंगत शिक्षा दूतों के नाम पर संस्था का नामकरण किया जाए और उनके योगदान को अमर बनाने के लिए उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाए।

हरीश कवासी ने यह भी कहा कि वर्तमान में प्रदेश सरकार द्वारा की जा रही नई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शिक्षा दूतों को विशेष छूट और प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही, नक्सल हिंसा से पीड़ित परिवारों को अब तक सरकारी नौकरी न मिलने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की और जल्द जांच कर पीड़ित परिवारों को मुआवजा एवं सरकारी नौकरी का लाभ देने की मांग की।
