दैनिक मूक पत्रिका बीजापुर/आशीष पदमवार – राज्य शासन की नक्सल उन्मूलन और पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणाम एक बार फिर सामने आए हैं। बीते बुधवार को जिले में 41 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से बुधवार को मिली जानकारी के मुताबिक, समर्पण करने वालों में 12 महिला और 29 पुरुष कैडर शामिल रहे, जो दक्षिण बस्तर दण्डकारण्य स्पेशल जोन कमिटी (डीकेएसजेसी) के अलावा तेलंगाना स्टेट कमिटी, धमतरी-गरियाबंद-नुआपाडा डिवीजन, पश्चिम बस्तर सप्लाई टीम, डीकेेे जोन और विभिन्न आरपीसी मिलिशिया समूहों में सक्रिय थे। इन 41 कैडरों में पीएलजीए बटालियन नंबर-01 के पीपीसीएम पदनाम वाले सदस्य, अलग-अलग कंपनियों, प्लाटून और एरिया कमेटी के प्रमुख कार्यकर्ता, मिलिशिया प्लाटून कमांडर और डिप्टी कमांडर, जनताना सरकार के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष स्तर पर सक्रिय सदस्य, डीकेएमएस और केएमएस संगठन से जुड़े फैसले लेने वाले कैडर भी शामिल हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में पण्डरू हपका उर्फ मोहन और उनकी पत्नी बडी हपका का नाम सबसे प्रमुख रहा, जो पीएलजीए बटालियन नंबर-01 में पीपीसीएम पद पर सक्रिय थे और दोनों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा कंपनी नंबर-02 के पीपीसीएम सदस्य लख्खू कोरसाम पर भी आठ लाख का इनाम था, जबकि प्लाटून नंबर-30 के पीपीसीएम सदस्य बदरू पुनेम और प्लाटून नंबर-50 के पीपीसीएम सदस्य सुखराम हेमला और उनकी पत्नी मंगुला हेमला उर्फ शांति पर भी आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था।

कंपनी नंबर-02 की पार्टी सदस्य मंगली माडवी उर्फ शांति उर्फ मंगली पर आठ लाख, कंपनी नंबर-02 के पार्टी सदस्य जयाराम कडियम और डीकेएफएनजी कंपनी-05 की सदस्य पांडे मडकम उर्फ चांदनी पर भी आठ लाख रुपये का इनाम था। भैरमगढ़ एरिया कमेटी सदस्य माटा कडियम उर्फ मंगल, और उनकी पत्नी जमली कडियम पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था, जबकि धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा डिवीजन के एसएल सदस्य जोगी मडकम उर्फ मालती पर भी पांच लाख रुपये का इनाम रखा गया था। तेलंगाना स्टेट कमेटी के पार्टी सदस्य छोटू कारम उर्फ छोटू कारम पर दो लाख का इनाम, पश्चिम बस्तर डिवीजन की सप्लाई टीम से जुड़े अनिल मडकम उर्फ मुड़ा और तेलंगाना स्टेट कमेटी पीएलजीए सदस्य सावित्री कारम उर्फ कविता पर भी दो-दो लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा कई अन्य नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया जिन पर इनाम रखा गया था।
एसपी जितेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण के तत्काल बाद दस्तावेजीकरण, विधिक सत्यापन और पुनर्स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और राज्य शासन की आत्मसमर्पण तथा पुनर्वास नीति के तहत प्रत्येक कैडर को 50 हजार रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता भी दी गई। पिछले 11 महीनों के आंकड़े माओवाद कमजोर होने की पुष्टि करते हैं। इस वर्ष एक जनवरी से अब तक माओवादी घटनाओं में शामिल 528 कैडर गिरफ्तार किए गए, 560 माओवादी संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटे, और जिले और आसपास के अभियानों में 144 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए, जबकि एक जनवरी 2024 से अब तक 790 माओवादी मुख्यधारा में लौटे, 1031 गिरफ्तार हुए और 202 कैडर अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए हैं।
