मूक पत्रिका रायपुर – छत्तीसगढ़ का आबकारी विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। राज्य में शराब कारोबार को लेकर बड़े स्तर पर अनियमितताओं और संगठित घोटाले के आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि सत्ता और कुछ चुनिंदा कारोबारियों के बीच गठजोड़ के चलते पूरे सिस्टम पर एकाधिकार (मोनोपॉली) स्थापित किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि प्रदेश में शराब के कारोबार को नियंत्रित करने के लिए नई रणनीति के तहत कुछ खास कंपनियों और ब्रांड्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि अन्य बाहरी ब्रांड्स की एंट्री सीमित हो गई है। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा खत्म होने और राजस्व व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या हैं मुख्य आरोप?
आरोप है कि आबकारी विभाग में उच्च स्तर पर बैठे कुछ अधिकारी पूरे सिस्टम को प्रभावित कर रहे हैं। मंत्रालय स्तर पर बैठकर शराब बिक्री और सप्लाई की रणनीति तय किए जाने की बात कही जा रही है।
कुछ खास ब्रांड्स को प्राथमिकता दिए जाने से बाजार में एक तरह की मोनोपोली बनने के आरोप हैं। शराब की पैकेजिंग, सप्लाई और मैनपावर तक में एक ही समूह की भूमिका होने की चर्चा है।
पूर्व सरकार से लेकर अब तक घोटालों की कड़ी
राज्य में शराब नीति को लेकर विवाद नया नहीं है। इससे पहले भी भूपेश बघेल की सरकार के दौरान आबकारी विभाग पर बड़े घोटालों के आरोप लगे थे, जिसने राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया था। अब मौजूदा भारतीय जनता पार्टी सरकार पर भी इसी तरह के आरोप लगना सियासी रूप से अहम माना जा रहा है।
पूर्व गृह मंत्री का पत्र बना बड़ा मुद्दा
मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब राज्य के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर संगठित भ्रष्टाचार की आशंका जताई है। उन्होंने अपने पत्र में यह भी संकेत दिया है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो इसका असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है।

केंद्र और राज्य नेतृत्व पर उठे सवाल
आरोपों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इन गतिविधियों की जानकारी है या नहीं।
वहीं, केंद्र के शीर्ष नेतृत्व जैसे नरेंद्र मोदी और अमित शाह से भी हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
अधिकारी तंत्र पर दबाव के आरोप
रिपोर्ट्स के अनुसार, विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर फाइलों में निर्णय लेने के लिए दबाव बनाए जाने की भी चर्चा है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एक समूह का शराब कारोबार पर नियंत्रण बढ़ता है, तो इससे न सिर्फ बाजार में असंतुलन पैदा होता है बल्कि सरकार के राजस्व और उपभोक्ता विकल्पों पर भी असर पड़ता है।
छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग को लेकर उठे ये आरोप गंभीर हैं और यदि इनमें सच्चाई है, तो यह एक बड़े घोटाले का संकेत हो सकता है। फिलहाल सरकार या संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
