50 शिक्षकों एवं परिवारजनों ने किया अमरकंटक के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थलों का अवलोकन
दैनिक मूक पत्रिका बेमेतरा – स्थित समाधान महाविद्यालय के लगभग 50 सहायक प्राध्यापकों एवं उनके परिवारजनों ने दो दिवसीय अमरकंटक की शैक्षणिक, पारिवारिक एवं आध्यात्मिक यात्रा में भाग लिया। यह यात्रा केवल भ्रमण नहीं रही, बल्कि ज्ञान, श्रद्धा और आत्मबोध से परिपूर्ण एक प्रेरणादायी अनुभव बन गई। सभी प्रतिभागियों ने इसे जीवन और शिक्षा को अर्थ देने वाली एक प्रेरक यात्रा के रूप में अनुभव किया। अमरकंटक अब केवल नर्मदा मैया और सोन नदी का उद्गम स्थल नहीं रहा, बल्कि वह स्थल बन गया जहाँ से ज्ञान, साधना और आत्मबोध की नवधारा प्रवाहित होती है। यही वह पावन भूमि है जहाँ श्रद्धेय ए. नागराज जी ने 1950 से 1970 तक 20 वर्षों की गहन तप-साधना कर भारतीय दर्शन परंपरा में विकसित किया — “मध्यस्थ दर्शन” (सह-अस्तित्ववाद), जो आज शिक्षा, समाज और व्यवस्था में समग्र मानवीय दृष्टि प्रदान करता है। यात्रा का सबसे प्रेरणादायी क्षण रहा — श्रद्धेय नागराज जी की साधना स्थली एवं निवास का दर्शन तथा पूजनीय अंबा दीदी (डॉ. शारदा शर्मा) से आत्मीय भेंट। दीदी ने श्रद्धेय बाबा जी के जीवन प्रसंगों और अपनी अनुभव यात्रा को अत्यंत सहजता, स्नेह और प्रश्नोत्तर के रूप में साझा किया। उनके सरल, सौम्य और समर्पित व्यक्तित्व ने सभी के हृदय को गहराई से छू लिया। यात्रा के दौरान सभी सदस्यों ने अमरकंटक के प्रमुख स्थलों — सोनमुड़ा, माई की बगिया, कपिलधारा, जैन मंदिर, नर्मदा उद्गम स्थल, मार्कण्डेय आश्रम आदि का दर्शन किया। सभी प्रतिभागियों ने अमरकंटक के ऐतिहासिक, पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व को समीप से जाना और आत्मिक शांति, ज्ञान एवं आनंद का अनुभव किया। परिवारजनों और बच्चों के साथ आपसी स्नेह, सहयोग और आत्मीयता का भाव और भी प्रगाढ़ हुआ। यह यात्रा केवल मनोरंजन का साधन नहीं रही, बल्कि मानवीय मूल्यों, पारिवारिक सौहार्द और सह-अस्तित्व की भावना को सशक्त करने वाली जीवन प्रेरणा बन गई। अंततः, यह दो दिवसीय अमरकंटक यात्रा समाधान महाविद्यालय परिवार के लिए एक स्मरणीय, सुखद और सार्थक अनुभव बनकर हृदय में सदा के लिए अंकित हो गई — जहाँ सभी ने प्रकृति, परिवार और ज्ञान के साथ सह-अस्तित्व का वास्तविक अर्थ अनुभव किया।

