केवल 5 जगहों पर पहुंचे कर्मचारी, गांवों में तैयार संरचनाओं की जानकारी करनी है तैयार
दैनिक मूक पत्रिका रायगढ़ – प्रदेश को स्वच्छ रखने के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ही सूचि एप क्रिएट किया गया है जिसमें जिले के सभी संरचनाओं की वर्तमान स्थिति की रिपोर्टिंग की जानी है। इस काम में रायगढ़ जिला फिसड्डी साबित हो रहा है। गांवों में कचरा प्रबंधन सेटअप के अलावा शौचालय आदि की एंट्री भी की जानी है। रायगढ़ जिले में अब तक पांच इकाइयों की जानकारी डाली जा सकी है। शहर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, सेग्रीगेशन, डंपिंग, डिस्पोजल आदि के लिए सेटअप बनाया गया है। इसी तर्ज पर गांवों में भी सफाई की जानी है। जिले में कई गांवों में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए निर्माण भी हुए हैं। महिला समूहों के लिए शेड भी बनाए गए हैं। हकीकत यह है कि इनका उपयोग ही नहीं हो रहा है।
गांवों में सफाई रखने के लिए सरकार ने सूचि एप तैयार किया है। इसमें व्यक्तिगत शौचालय, नाडेप, स्कूल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्व सहायता समूह, पंचायत भवन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, आंगनबाड़ी, सेग्रीगेशन शेड, सीएससी, रिक्शा, फिकल स्लज आदि का सर्वे करके एंट्री की जानी है। प्रत्येक जिला पंचायत को अपने कर्मचारियों से सर्वे करवाना है। एप को आए कई महीने हो गए हैं लेकिन जिला पंचायत की ओर से कोई सक्रियता नहीं देखी गई है। अब तक चार व्यक्तिगत शौचालय और एक तरल अपशिष्ट प्रबंधन को ही सर्वे में दर्ज किया गया है। स्वच्छ भारत अभियान को पूरा करने के लिए पंचायत स्तर पर काम करना जरूरी है। ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कोई भी व्यवस्था ही नहीं है।
गांवों में भर रहा प्लास्टिक कचरा
ग्राम पंचायतों में स्वच्छता के नाम पर केवल झूठ कहा जा रहा है। सरपंच और सचिवों को खुली छूट दी गई है। जबकि सच यह है कि अभी तक ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कोई भी उपाय नहीं किए गए हैं। प्लास्टिक कचरे से हर गांव परेशान है। इसके निराकरण के लिए कोई रास्ता नहीं निकाला गया है।
