आवापल्ली स्वास्थ्य केंद्र में मचा हंगामा
दैनिक मूक पत्रिका/बीजापुर- जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आवापल्ली में सोमवार सुबह इलाज के दौरान दो महीने के मासूम बच्चे की मौत से हड़कंप मच गया। परिजनों ने डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इंजेक्शन के ओवरडोज़ देने के चलते ही बच्चे की जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और आमलोगों ने हंगामा किया और जिम्मेदार डॉक्टर व नर्स पर कार्रवाई की मांग की। मृतक बच्चे की पहचान ग्राम मुर्दोण्डा निवासी साहिल झाड़ी के पुत्र सूर्यांश के रूप में हुई है। परिजनों ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 9 बजे वे अपने बच्चे को हल्का बुखार और सर्दी-खांसी की शिकायत पर आवापल्ली अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार, डॉक्टर ने बिना जांच किए बच्चे को कैनुला लगाकर लगातार पांच इंजेक्शन दे दिए। कुछ ही मिनटों में बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने बताया कि उन्होंने सिरप या भाप देने की सलाह दी थी, लेकिन डॉक्टर और नर्स ने उनकी बात को नज़रअंदाज़ कर कहा हमें अपना काम आता है, आप मत सिखाइए। साथ ही बताया डॉक्टर हर्षवर्धन मौके पर मौजूद नही थे।बच्चे की हालत बिगड़ने के बाद भी उन्हें समय पर मदद नहीं मिली। पिता साहिल झाड़ी ने आरोप लगाया कि अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं रहते है, और नर्सें ही फोन पर डॉक्टर से पूछकर इलाज करती हैं। उन्होंने कहा अगर डॉक्टर खुद जांच करते और समय पर इलाज मिलता, तो शायद मेरा बच्चा जीवित होता। उन्होंने दोषी डॉक्टर और स्टाफ नर्स पर सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में किसी और परिवार के साथ ऐसी घटना न हो।

इस मामले में सीएमएचओ डॉ. बी.एल. पुजारी ने बताया कि बच्चे की हालत पहले से गंभीर थी। उनका कहना है कि बच्चे का ऑक्सीजन स्तर (SPO2) 60 से 62 के बीच था, और इतनी कम ऑक्सीजन स्थिति में मौत की संभावना बहुत अधिक होती है। उन्होंने बताया कि बच्चे को तीन इंजेक्शन दिए गए थे सेफ्ट्रियाक्सोन, पीसीएम और ओन्डैनसेट्रॉन जो सामान्य इलाज का हिस्सा हैं। डॉक्टर हर्षवर्धन को जब सूचना दी गई, तब वह कुछ देर बाद स्वयं पहुंचे और बच्चे को अटेंड किया। प्राथमिक इलाज में किसी तरह की गलती नहीं दिख रही, फिर भी विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

बीएमओ डॉ. उमेश ठाकुर ने भी स्पष्ट किया कि बच्चे को निमोनिया की शिकायत थी और वह गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था। हमारी टीम ने स्थिति के अनुसार सामान्य उपचार किया। परिजन भावुक हैं, इसलिए उन्होंने गलतफहमी में आरोप लगाया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार तीन दिन पहले शनिवार को ही बच्चे को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर मुरडुंडा में टीकाकरण के लिए लाया गया था, लेकिन वहां के स्वास्थ्यकर्मियों ने निमोनिया की आशंका बताकर टीका लगाने से मना किया था और डॉक्टर को दिखाने की सलाह दी थी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

घटना के बाद आवापल्ली अस्पताल में तनाव का माहौल रहा। स्थानीय लोगो ने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और मरीजों के इलाज में लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई हो। मासूम सूर्यांश की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। परिजन अब न्याय और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
