दैनिक मूक पत्रिका दंतेवाड़ा – दक्षिण बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पत्रकारिता करना हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। यहाँ सच्चाई लिखना न केवल कठिन, बल्कि कई बार जानलेवा भी साबित होता है। इसी बीच एक जिला अध्यक्ष द्वारा पत्रकार को दी गई धमकी ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है — क्या लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अब सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है?
पत्रकारों को सुरक्षा का आश्वासन तो अक्सर दिया जाता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। दक्षिण बस्तर, दंतेवाड़ा और आसपास के जिलों में कार्यरत पत्रकार रोज़ जोखिम उठाकर सच्चाई जनता तक पहुँचाते हैं। बावजूद इसके, उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा मिलती है और न ही सरकार या प्रशासन की कोई ठोस पहल नज़र आती है।
पत्रकारों ने बताया कि “हम सच्चाई लिखने के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर काम करते हैं। भ्रष्टाचार या सत्ता के खिलाफ आवाज़ उठाने की कीमत कई बार जान देकर चुकानी पड़ती है।” कई मामलों में धमकियाँ, फर्जी मुकदमे और यहाँ तक कि शारीरिक हमले भी होते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है।

पत्रकारों की बढ़ती असुरक्षा
हाल के वर्षों में पत्रकारों पर बढ़ते हमले और धमकी की घटनाएं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और विभिन्न मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों के अनुसार, ग्रामीण और छोटे कस्बों में कार्यरत पत्रकार सबसे अधिक खतरे में हैं।
कोरोना काल में निभाई थी जिम्मेदारी, अब खुद असुरक्षित
पत्रकारों ने याद दिलाया कि कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा देश घरों में था, तब उन्होंने जान जोखिम में डालकर जनसेवा की थी। लेकिन आज वही पत्रकार अपनी सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पत्रकार संगठनों की मांग
पत्रकार संगठनों ने एक स्वर में मांग की है कि सरकार तत्काल “पत्रकार सुरक्षा कानून (Journalist Protection Act)” लागू करे। इसके साथ ही धमकी या हमलों की घटनाओं की त्वरित जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
निष्कर्ष :
पत्रकार लोकतंत्र की आँख और कान हैं। यदि इन पर हमले बढ़ते रहे और सच्चाई की आवाज़ को दबाया जाता रहा, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर पड़ जाएगी। अब समय आ गया है कि सरकार, समाज और मीडिया संस्थान मिलकर पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें — ताकि कोई भी पत्रकार भय के साये में सच्चाई लिखने से न रुके।
