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दंतेवाड़ा। नक्सल प्रभावित और संवेदनशील माने जाने वाले दंतेवाड़ा जिले में जहां समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिलना किसी चुनौती से कम नहीं, वहां संजीवनी 108 एम्बुलेंस सेवा पर लगे ताजा आरोप व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। जीवन बचाने के लिए शुरू की गई यह सेवा अब खुद सवालों के घेरे में है। कर्मचारियों ने जय अंबे इमरजेंसी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के अधिकारियों पर शोषण, फर्जीवाड़े और गंभीर लापरवाही के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
खटारा गाड़ियों से कैसे बचेगी जान?
बताया जा रहा है कि जिले की ज्यादातर एम्बुलेंस 3 से 4 लाख किलोमीटर चल चुकी हैं और उनकी हालत कबाड़ जैसी हो चुकी है। कई गाड़ियां महीनों से गैराज में खड़ी हैं, लेकिन कागजों में उनकी मेंटेनेंस दिखाकर फर्जी बिल के जरिए सरकारी राशि निकाली जा रही है।
जमीनी सच्चाई यह है कि
किसी का सायरन बंद
किसी की हेडलाइट गुल
मरीज केबिन में लाइट नहीं
जीवनरक्षक दवाइयां और जरूरी इक्विपमेंट तक गायब
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल — क्या नक्सल क्षेत्र में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है?

कर्मचारियों पर अत्याचार, अधिकारी बेपरवाह
ईएमटी और पायलटों का आरोप है कि गाड़ी खराब होने पर मेंटेनेंस सुधारने के बजाय उन पर ही कार्रवाई कर दी जाती है। बिना कारण “नो वर्क नो पेमेंट” में डालकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
इतना ही नहीं, अनुभवी पायलटों को बाहर कर अप्रशिक्षित टेक्नीशियन से एम्बुलेंस चलवाई जा रही है — जिनके पास न लाइसेंस है न ड्राइविंग का अनुभव। यानी मरीज की जान सीधे जोखिम में।
90 केस का टारगेट और फर्जीवाड़े का दबाव
हर एम्बुलेंस को महीने में 90 केस का टारगेट दिया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि टारगेट पूरा नहीं होने पर फर्जी केस बनवाए जाते हैं।
आरोप तो यहां तक है कि पिछले महीनों में करीब 70 प्रतिशत केस फर्जी बनाकर सरकार को चूना लगाया गया।
शिकायत करो तो बाहर का रास्ता
कर्मचारियों का दर्द है कि अधिकारियों को समस्या बताने पर समाधान नहीं बल्कि धमकी और नौकरी से निकालने का डर मिलता है। वेंडरों को भुगतान नहीं होने से मेंटेनेंस भी प्रभावित है, लेकिन जिम्मेदारी नीचे के कर्मचारियों पर डाली जा रही है।
बड़े सवाल
नक्सल प्रभावित जिले में स्वास्थ्य सेवा के नाम पर यह कैसा खेल?
खड़ी एम्बुलेंस का फर्जी बिल किसके संरक्षण में?
बिना लाइसेंस गाड़ी चलवाकर किसकी जान जोखिम में डाली जा रही है?
फर्जी केस बनाकर सरकारी खजाने में सेंध कौन लगा रहा है?
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस ‘एम्बुलेंस घोटाले’ पर कार्रवाई करते हैं या फिर जीवनदायिनी 108 यूं ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहेगी।
