मूक पत्रिका रायपुर/ माना तूता। फिल्म सिटी के नाम पर हरियाली की खुलेआम हत्या का मामला अब सड़क पर आ गया है। माना तूता के जंगल में प्रस्तावित फिल्म सिटी (चित्रोत्पला) परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के विरोध में पर्यावरण प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने धरना प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस परियोजना के लिए कुल 1500 पेड़ों को काटने की योजना बनाई गई है, जबकि करीब 200 पेड़ बिना किसी वैधानिक अनुमति के पहले ही काटे जा चुके हैं। यह न सिर्फ पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।
धरने के दौरान गूंजे नारे—
“फिल्म सिटी के नाम पर हरियाली की हत्या बंद करो”,
“पेड़ नहीं तो कल नहीं”,
“जंगल बचेगा तो जीवन बचेगा”।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण की बात करती है, तो दूसरी ओर जंगल काटकर विकास का ढोल क्यों पीटा जा रहा है? उन्होंने मांग की कि तत्काल पेड़ कटाई पर रोक लगे, अवैध रूप से काटे गए पेड़ों की जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति (EIA) सार्वजनिक की जाए।
धरने में शामिल लोगों ने चेतावनी दी कि यदि पेड़ों की कटाई नहीं रोकी गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अब बड़ा सवाल यह है— क्या विकास के नाम पर जंगलों का सफाया ही सरकार की नीति बन गई है?
