डीवीसीएम, एसीएम और जनताना सरकार अध्यक्ष समेत कई माओवादियों ने किया सरेंडर
दैनिक मूक पत्रिका/बीजापुर- जिले में गुरुवार को नक्सल उन्मूलन की दिशा में सुरक्षाबलों को ऐतिहासिक सफलता मिली। एक करोड़ छह लाख तीस हजार के 49 इनामी माओवादियों सहित कुल 103 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला लिया। सरेंडर करने वालों में डीवीसीएम-1, पीपीसीएम-4, एसीएम-4, प्लाटून पार्टी सदस्य-1, जनताना सरकार अध्यक्ष-4, मिलिशिया कमांडर डिप्टी-5 समेत कई कैडर के माओवादी शामिल हैं। लंबे समय से सक्रिय इन माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ समाज और विकास की धारा में जुड़ने का संकल्प लिया है। लगातार सुरक्षा बलों द्वारा जारी अभियान और नयें सुरक्षा कैम्प खोले जाने के चलते माओवादी संगठन का जनाधार इलाके में कमजोर हो रहा है साथ ही बुनियादी सुविधाओं से ग्रामीण इलाकों में विश्वास बढ़ा है।

सरेंडर करने वाले बड़े इनामी माओवादी:
- माडवी देवा उर्फ देवा (डीवीसीएम) – 20 लाख का इनामी, दक्षिण बस्तर डिवीजन का बड़ा चेहरा।
- हिड़मा पूनेम उर्फ रामुलु (पीपीसीएम) – 8 लाख का इनामी, कई हमलों की योजना में शामिल।
- कोसा कवासी (एसीएम) – 5 लाख का इनामी, तर्रेम इलाके की वारदातों में नामजद।
- मडकम बुधरु (मिलिशिया कमांडर) – 3 लाख का इनामी, आईईडी विस्फोटों का मुख्य आरोपी।
- मुचाकी आयतु (जनताना सरकार अध्यक्ष) – 2 लाख का इनामी, गांवों में समानांतर नक्सली सरकार चलाता था।
इसके अलावा दर्जनों 1-1 लाख और 50-50 हजार के इनामी भी सूची में शामिल हैं।

बीजापुर एसपी का बयान
बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया यह आत्मसमर्पण नक्सली संगठन की कमजोर होती पकड़ का स्पष्ट संकेत है। अब संगठन का जनाधार लगभग खत्म हो रहा है। हमारी कोशिश है कि जो भी नक्सली हिंसा छोड़कर समाज में लौटना चाहता है, उसका स्वागत किया जाएगा। लेकिन जो हथियार उठाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। एसपी ने यह भी बताया कि सभी नक्सलियों को पुनर्वास नीति के तहत 50-50 हजार रुपये का प्रोत्साहन चेक दिया गया है और आगे उन्हें रोजगार एवं शिक्षा से जोड़ा जाएगा।
