मूक पत्रिका नई दिल्ली। भिलाई नगर विधानसभा निर्वाचन से जुड़े चुनाव याचिका मामले में कांग्रेस नेता देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने देवेंद्र यादव द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि देवेंद्र यादव को अब हाईकोर्ट में चुनाव याचिका का सामना करना ही होगा।
क्या है पूरा मामला
यह मामला पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे द्वारा दायर चुनाव याचिका से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय ने इस याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने से इनकार करते हुए विस्तृत सुनवाई के लिए स्वीकार किया था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति सूर्य कांत एवं न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची की पीठ के समक्ष हुई।
देवेंद्र यादव की दलीलें
देवेंद्र यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि शपथपत्र में ‘प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर’ (घोषित फरार आरोपी) की स्थिति बताना आवश्यक नहीं था। 2018 और 2023 के शपथपत्रों में संपत्ति मूल्य में अंतर अनजाने में हुई गलती है। चुनाव के दौरान की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस को भ्रष्ट आचरण नहीं माना जा सकता।

पाण्डेय पक्ष का पलटवार
प्रेम प्रकाश पांडे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि यदि प्रत्याशी किसी मामले में ‘प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर’ घोषित है, तो यह मतदाताओं के जानने के अधिकार से जुड़ा गंभीर तथ्य है। संपत्ति के मूल्यांकन में भारी अंतर और कथित गलत घोषणा विस्तृत साक्ष्य की मांग करती है। चुनाव के दौरान की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस और लगाए गए आरोपों का प्रभाव साक्ष्य के आधार पर ही तय होगा। कई तर्क सुप्रीम कोर्ट में पहली बार उठाए गए, जो हाईकोर्ट में नहीं रखे गए थे।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और उनका पूरा न्यायिक परीक्षण आवश्यक है। इस स्तर पर हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
