ग्राम उफरा की बासन बाई यादव के संघर्ष और आत्मविश्वास की प्रेरक कहानी
बेमेतरा – अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर समाज में ऐसी अनेक महिलाओं की कहानियाँ सामने आती हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने साहस, धैर्य और आत्मविश्वास से जीवन को नई दिशा दी। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी जिला बेमेतरा के ग्राम पंचायत उफरा की निवासी 70 वर्षीय श्रीमती बासन बाई यादव की है, जिनके जीवन में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने एक नया उजाला भर दिया। जिला स्तरीय महिला सम्मेलन/महिला मड़ई के अवसर पर बासन बाई यादव की कहानी इस बात का उदाहरण बनकर सामने आई कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिलने पर गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन संभव है। वर्षों तक कच्चे और जर्जर मकान में जीवन बिताने वाली बासन बाई आज अपने पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रही हैं।
संघर्ष और कठिनाइयों से भरी जिंदगी
“छत टपकती थी उसके कच्चे मकान की, फिर भी इरादा मजबूत था बासन बाई की।” ये पंक्तियाँ बासन बाई यादव के जीवन के संघर्ष और उनके मजबूत इरादों को बखूबी दर्शाती हैं। ग्राम पंचायत उफरा की रहने वाली बासन बाई यादव एक बुजुर्ग विधवा महिला हैं, जो अपनी बेटी और दामाद के साथ रहती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके पास रहने के लिए केवल एक कच्चा और जर्जर मकान ही था। घर की हालत इतनी खराब थी कि उसमें ठीक से बैठने और सोने तक की जगह नहीं होती थी। बरसात के मौसम में मकान की छत से पानी टपकता रहता था और पूरा घर भीग जाता था। बरसात की रातें उनके लिए सबसे ज्यादा कठिन होती थीं। पानी टपकने के साथ-साथ सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीवों के घर में घुस आने का खतरा हमेशा बना रहता था। ऐसी स्थिति में पूरा परिवार डर और चिंता के बीच रात गुजारने को मजबूर था।
प्रधानमंत्री आवास योजना बनी जीवन की नई उम्मीद
बासन बाई यादव के जीवन में बदलाव की शुरुआत तब हुई, जब उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृत हुआ। जब उन्हें योजना की पहली किस्त प्राप्त हुई, तो उनके जीवन में नई उम्मीद की किरण जाग उठी। उन्होंने तुरंत अपने पक्के घर के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया। घर निर्माण में उनकी बेटी और दामाद ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने श्रमदान करते हुए पूरे मन से घर बनाने में सहयोग दिया। निर्माण कार्य के दौरान उन्हें लगभग 90 मानव दिवस का रोजगार भी प्राप्त हुआ, जिससे परिवार को आर्थिक सहयोग भी मिला।ग्राम पंचायत और प्रशासन के सहयोग से उन्हें योजना की सभी किस्तें समय पर प्राप्त हुईं और जल्द ही उनका पक्का मकान बनकर तैयार हो गया।
अब मिला सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास
घर का निर्माण पूर्ण होने के बाद बासन बाई यादव अपने नए पक्के मकान में रहने लगी हैं। यह मकान उनके लिए केवल एक घर नहीं, बल्कि उनके संघर्ष और आत्मविश्वास की जीत का प्रतीक है। अब उन्हें बरसात में छत टपकने की चिंता नहीं रहती और न ही सांप-बिच्छू का डर सताता है। पक्के घर ने उन्हें सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन प्रदान किया है। बुढ़ापे में यह घर उनके लिए एक मजबूत सहारा बन गया है, जहां वे सुकून और गर्व के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रही हैं।
योजना ने लौटाई चेहरे की मुस्कान
बासन बाई यादव कहती हैं कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके जीवन को बदल दिया है। पहले जहां उन्हें अपने घर की खराब स्थिति को लेकर चिंता रहती थी, वहीं आज अपने पक्के घर को देखकर उनके चेहरे पर संतोष और आत्मविश्वास की चमक दिखाई देती है। उनका कहना है कि यह घर उनके लिए केवल एक आशियाना नहीं, बल्कि जीवन भर के संघर्ष का फल है।
महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बासन बाई यादव की कहानी महिला सशक्तिकरण की एक सशक्त मिसाल बनकर सामने आती है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए धैर्य और साहस के साथ अपने जीवन को आगे बढ़ाया। आज उनकी यह कहानी न केवल गांव की महिलाओं के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह दर्शाती है कि यदि अवसर और सहयोग मिले, तो महिलाएं हर चुनौती का सामना कर अपने सपनों को साकार कर सकती हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से हजारों परिवारों को पक्का घर मिल रहा है और उनके जीवन में स्थिरता और सम्मान का नया अध्याय जुड़ रहा है।
बासन बाई यादव की कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब सरकारी योजनाएं सही पात्रों तक पहुंचती हैं, तो वे लोगों के जीवन में सकारात्मक और स्थायी बदलाव ला सकती हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इस अवसर पर बासन बाई यादव जैसी संघर्षशील महिलाओं को नमन करते हुए यह कहना उचित होगा कि उनका साहस और आत्मविश्वास समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
