मूक पत्रिका रायपुर/ डेस्क – राजधानी रायपुर से एक बेहद सनसनीखेज और गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक 15 वर्षीय दलित नाबालिग किशोरी ने केक व्यवसायी वीर शर्मा, उनकी एयर होस्टेस पत्नी भारती शर्मा और विधानसभा थाना के कुछ पुलिसकर्मियों पर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना, जातिसूचक गाली-गलौच, झूठे चोरी के मामले में फंसाने की साजिश और लाखों रुपये की जबरन वसूली का गंभीर आरोप लगाया है।
पीड़िता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित शिकायत दी है। मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल मच गई है।

आर्थिक तंगी के कारण करने लगी थी काम
पीड़िता ग्राम दोंदे खुर्द, थाना विधानसभा क्षेत्र की रहने वाली है। उसने बताया कि पारिवारिक आर्थिक तंगी और घर में लगातार होने वाले झगड़ों के कारण वह अपनी मौसी बाल्की रात्रे और मौसा जीवन रात्रे के साथ पिरदा में रहने लगी थी। इसी दौरान अक्टूबर–नवंबर 2025 में वह पिरदा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी केक व्यवसायी वीर शर्मा के घर झाड़ू-पोंछा और खाना बनाने का काम करने लगी।
काम के दौरान जातिसूचक गालियां और धमकी
पीड़िता का आरोप है कि काम के दौरान छोटी-छोटी बातों पर वीर शर्मा और उनकी पत्नी भारती शर्मा उसे जातिसूचक गालियां देते थे। विरोध करने पर उसे चोरी के झूठे मामले में फंसाने और पुलिस से जेल भिजवाने की धमकी दी जाती थी। पीड़िता ने बताया कि वीर शर्मा बार-बार फोन कर काम पर आने का दबाव बनाते थे और मना करने पर पुलिस से मिलकर कार्रवाई कराने की धमकी देते थे।
संदिग्ध पॉलिथीन रखने को कहा, तब हुआ शक
पीड़िता के अनुसार 23 और 24 जनवरी 2026 को वीर शर्मा ने फोन कर घर में रखी एक पॉलिथीन को बिना खोले चावल के डिब्बे में रखने और उसकी फोटो व्हाट्सएप पर भेजने को कहा। इस घटना के बाद उसे शक हुआ कि कहीं उसे किसी झूठे मामले में फंसाने की साजिश तो नहीं रची जा रही। इसी डर के कारण उसने 25 जनवरी से वहां काम पर जाना बंद कर दिया।
पुलिस के साथ घर पहुंचा आरोपी, रास्ते में मारपीट
करीब 20 दिन बाद 13 फरवरी को वीर शर्मा अपनी पत्नी और विधानसभा थाना के दो पुलिसकर्मियों के साथ पिरदा पहुंचे और पीड़िता को अपने साथ ले गए। पीड़िता का आरोप है कि रास्ते में पुलिसकर्मियों ने उसके बाल पकड़कर कई थप्पड़ मारे और चोरी के गहनों के बारे में पूछते हुए गाली-गलौच की।
तीन लाख रुपये की मांग, बाद में दो लाख पर दबाव
पीड़िता के मुताबिक उसे थाना ले जाकर तीन लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया। बाद में यह रकम घटाकर दो लाख रुपये कर दी गई।
आरोप है कि पैसे नहीं देने पर पूरे परिवार को जेल भेजने की धमकी दी गई। डर के कारण उसके मौसा-मौसी ने ब्याज पर पैसा उधार लेकर 40 हजार रुपये की पहली किस्त आरोपी को दे दी। बताया गया कि यह रकम आरोपी के घर के पास एक किराना दुकान के सामने दी गई, जिसकी सीसीटीवी रिकॉर्डिंग होने का दावा भी किया गया है।

सबूत मिटाने का आरोप
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि 20 फरवरी को पुलिस दोबारा उसके घर पहुंची और तलाशी के दौरान उसकी और उसकी मौसी की मोबाइल फोन छीनकर उनमें मौजूद ऑडियो-वीडियो सबूत डिलीट कर दिए। साथ ही उसके नाबालिग होने के प्रमाण के रूप में रखी कक्षा आठवीं की अंकसूची भी अपने साथ ले गए।
थाने में महिला पुलिसकर्मियों ने पट्टे से पीटा
पीड़िता का आरोप है कि बाद में उसे जबरन थाना ले जाकर महिला पुलिसकर्मियों द्वारा पट्टे से मारपीट की गई, जिससे उसके कान से खून निकलने लगा।
डर के कारण उसने झूठा बयान दे दिया कि उसने गहने आरंग में बेच दिए हैं। हालांकि बाद में आरंग के किसी भी ज्वेलर्स ने उसकी पहचान नहीं की और न ही सीसीटीवी में ऐसा कोई सबूत मिला।
कोर्ट में दबाव में कराया गया समझौता
पीड़िता का कहना है कि 23 फरवरी को उसे कोर्ट ले जाकर दबाव में समझौता कराया गया और उसके मौसा से आईडीबीआई बैंक का ब्लैंक चेक भी ले लिया गया।
इसके बाद से आरोपी लगातार फोन कर 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक की मांग कर रहे हैं और धमकियां दे रहे हैं।
पुलिस–व्यवसायी की मिलीभगत का आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पूरे मामले में केक व्यवसायी वीर शर्मा, उनकी पत्नी भारती शर्मा और विधानसभा थाना के कुछ पुलिसकर्मी आपस में मिलीभगत कर उसे फंसाने और पैसे वसूलने की कोशिश कर रहे हैं।
एसपी ने लिया संज्ञान, जांच शुरू
मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने ग्रामीण पुलिस अधीक्षक श्वेता सिन्हा से शिकायत की है। एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं और अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओपी) वीरेंद्र चतुर्वेदी, विधानसभा को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। साथ ही आरोपी वीर शर्मा उर्फ श्रीजल शर्मा की शिकायत पर मामले से जुड़े प्रधान आरक्षक को विधानसभा थाना से हटाकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में अटैच कर दिया गया है। एसडीओपी ने जांच को आगे बढ़ाते हुए 13 मार्च 2026 को पीड़ित परिवार को बयान दर्ज कराने के लिए कार्यालय बुलाया है।
अब जांच पर टिकी सबकी नजर
राजधानी में दलित नाबालिग से जुड़े इस गंभीर मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि क्या पीड़िता को न्याय मिलेगा या मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
