oplus_0
दैनिक मूक पत्रिका/भैरमगढ़/बीजापुर। बिरसा मुंडा जयंती के मौके पर सर्व आदिवासी समाज ने शनिवार को भैरमगढ़ में बड़ी रैली निकालते हुए कई प्रमुख मुद्दों पर सरकार का ध्यान खींचा। समाज ने एसडीएम को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्यपाल के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें आदिवासी क्षेत्रों के लिए कानूनी और प्रशासनिक सुधारों की मांग रखी गई।

रैली में आदिवासी भूमि सुरक्षा कानून लागू करने, ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार देने, डीएमएफ और टीएसपी राशि का सीधा हस्तांतरण शुरू करने और अबूझमाड़ में बाहरी बसावट पर रोक लगाने की बात प्रमुखता से उठाई गई। समाज का कहना है कि इन कदमों से आदिवासी इलाकों में शांति, भरोसा और न्याय की प्रक्रिया मजबूत होगी। जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी ने कहा कि पाँचवीं अनुसूची के प्रावधानों को जमीन पर उतारना जरूरी है। उन्होंने टीएसी की बैठक जल्द बुलाने की भी मांग रखी।
बिरसा मुंडा की विचारधारा आज भी मार्गदर्शक: विक्रम मंडावी
ज्ञापन सौंपने से पहले पुराने बाजार स्थल पर हुई आम सभा में बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि बिरसा मुंडा ने उस दौर में संघर्ष किया जब अंग्रेज सरकार और जमींदार आदिवासियों की जमीन छीन रहे थे। उन्होंने याद दिलाया कि बिरसा मुंडा का संदेश “अबुआ दिसुम, अबुआ राज” हमें बताता है कि जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि समुदाय की पहचान और अस्तित्व है

उन्होंने कहा कि बिरसा के नेतृत्व में चला उलगुलान आदिवासी अधिकारों का निर्णायक आंदोलन था, जिसका असर यह हुआ कि 1908 में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम लागू किया गया। इससे जमीन पर आदिवासियों के पारंपरिक हक को कानूनी सुरक्षा मिली।
समाज ने दोहराया संघर्ष और एकता का संकल्प
सभा में जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी ने कहा कि बिरसा मुंडा ने सिखाया कि अधिकारों की रक्षा संगठन और संघर्ष से ही संभव है। ब्लॉक अध्यक्ष सीताराम मांझी ने कहा कि उनकी विचारधारा हमें जमीन, संस्कृति और जनअधिकारों की रक्षा के लिए प्रेरित करती है।
सभा को दशरथ कुंजाम, बलदेव अतरा, रानू सोरी, रतन कश्यप, सत्य प्रेम वेंजम, रामलाल यादव, शिव पुनेम, भावसिंह भास्कर और दसमत पोडियामी सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
कार्यक्रम में सीएस नेताम, कमलेश पैंकरा, बुधराम गावड़े, सरजू भास्कर, सोहन भोगामी, मुर्रा वेट्टी, जोगा माड़वी, दुल्ला कश्यप, चैतुराम हपका, विशु इच्छम, मनधर नाग, सुनील एर्पुडे, मोटू वेट्टी और श्रवण सैंड्रा समेत बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।
