दैनिक मूक पत्रिका कांकेर :- कांकेर वन पट्टा फर्जीवाड़ा मामले में विचाराधीन कैदी रहे आदिवासी समाज के वरिष्ठ नेता जीवन ठाकुर की जिला जेल कांकेर में हुई संदिग्ध मृत्यु ने जिले में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। मृतक के परिजनों ने 4 दिसंबर को प्रशासन को आवेदन सौंपकर जेल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही और सूचना छिपाने का आरोप लगाया है।
परिजनों के अनुसार, जेल अभिरक्षा के दौरान जीवन ठाकुर की मौत की जानकारी समय पर परिवार को नहीं दी गई, जिससे शक की स्थिति और गहरा गई है। उनका कहना है कि घटना में राजनीतिक एवं सामाजिक द्वेष की भूमिका नज़र आती है और जानकारी छिपाने की नीयत स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

परिजनों ने मांग की है कि घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। शिकायत में जिन अधिकारियों पर संदेह व्यक्त किया गया है, उनमें शामिल हैं-
थाना प्रभारी चारामा तेज कुमार वर्मा,नायब तहसीलदार कृष्णा पाटले,जेल अधीक्षक जिला जेल कांकेर वी. रेनु ध्रुव जेल अधीक्षक केंद्रीय जेल रायपुर योगेश कुमार क्षत्रीपरिजनों का कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो सर्व आदिवासी समाज उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है, वहीं सामाजिक संगठनों ने भी इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। आदिवासी समाज ने किया चारामा मे चक्काजाम
जेल एवं पुलिस प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी चारामा के नेशनल हाईवे 30 पर चक्काजाम कर दिया है। आदिवासी समाज के लोगों ने जेल प्रशासन पर उनकी हत्या किये जाने का आरोप लगाते हुए न्यायिक जांच कराने की मांग की है। सड़क जाम के दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला पुरुष नेशनल हाईवे 30 पर नारेबाजी करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्यवाही किये जाने की माँग की हैं।
