दैनिक मूक पत्रिका रायगढ़ – धरमजयगढ़ के रायमेर गांव में एक बड़ा सरकारी जमीन घोटाला सामने आया है। शासकीय भूमि को तीन व्यक्तियों ने पटवारी के साथ मिलकर बेच दिया । पटवारी राकेश साय ने दो अन्य व्यक्तियों, कैलाश जेठवानी और मधुसूदन अग्रवाल के साथ मिलकर शासकीय भूमि को बेच दिया। इस जमीन को पहले उजित राम के नाम पर दर्ज किया गया । फिर कैलाश जेठवानी निवाशी धरमजयगढ़ के नाम पर किया गया । कैलाश ने ये जमीन मधुसूदन अग्रवाल निवाशी पत्थलगांव को बेच दिया।
धरमजयगढ़ के रायमेर गांव में सरकारी जमीन को हथियाने का यह तरीका बेहद आश्चर्यजनक और चिंताजनक है। ग्राम रायमेर की तीन शासकीय जमीनें (खनं 467/23, 467/25, 467/36) बड़े झाड़ के जंगल मद में दर्ज थीं, जिनका कुल रकबा लगभग 2.087 हेक्टेयर है।
जमीन का इतिहास:
- 1930 में: मूल खसरा नंबर 467 में 89.46 हेक्टेयर जंगल मद दर्ज था।
- बाद में: इस जमीन के कई टुकड़े ग्रामवासियों को पट्टेदार के रूप में आवंटित किए गए।
- अद्यतन स्थिति: लेकिन उपरोक्त तीनों खसरों में किसी का नाम दर्ज नहीं था, फिर भी इन्हें फर्जी तरीके से बेच दिया गया।
घोटाले की मुख्य बातें:
- जमीन की स्थिति: खनं 467/23, 467/25, 467/36 शासकीय भूमि थी, जिसे फर्जी तरीके से बेचा गया।
- फर्जी तरीके: उजित राम किसी कैलाश जेठवानी को नहीं जानता, फिर भी पावर ऑफ अटॉर्नी दी गई।
- पटवारी की भूमिका: पटवारी राकेश साय ने विक्रय पत्र के साथ फर्जी दस्तावेज दिए।
- जांच और कार्रवाई: शिकायत के बाद जांच हुई, एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा हुई, लेकिन फाइल दबा दी गई।
- अद्यतन स्थिति: जमीन अभी भी भूमिस्वामी कृषि भूमि के रूप में दर्ज है, और उस पर धान की फसल की गिरदावरी हो रही है।
यह मामला दिखाता है कि कैसे धनबल और मिलीभगत से सरकारी जमीनों को हथियाया जा रहा है। आम आदमी को अपनी जमीन का सीमांकन कराने में परेशानी होती है, जबकि यहां सब कुछ चुटकियों में हुआ।

क्या इस मामले में प्रशासन से और सख्त कार्रवाई की मांग की जानी चाहिए? या आपको लगता है कि और क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
