मूक पत्रिका रायपुर – सरकारी खरीद के लिए बने GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल पर एक बड़े फर्नीचर टेंडर ने प्रदेश में भूचाल ला दिया है। 42,688 यूनिट की कुल खरीदी वाले इस बिड में 80% Past Performance की शर्त ने छत्तीसगढ़ के लगभग 99% स्थानीय फर्नीचर निर्माताओं (MSME) को स्वतः ही बाहर कर दिया है। सवाल उठ रहा है—क्या यह शर्त निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के खिलाफ है? और क्या इससे एक ही कंपनी को फायदा पहुंचाने का रास्ता बनाया गया?

आंकड़े जो सवाल खड़े करते हैं
कुल मात्रा (Qty): 42,688 मांगी गई Past Performance: 80%
एक साल में न्यूनतम आपूर्ति: 34,150 यूनिट व्यवहारिक सच्चाई यह है कि छत्तीसगढ़ की अधिकांश फर्नीचर इकाइयाँ MSME/स्थानीय हैं, जिनके लिए एक ही वर्ष में 34,150 यूनिट की आपूर्ति करना लगभग असंभव है। नतीजा—स्थानीय उद्योग बाहर, बड़े या पूर्व-निर्धारित खिलाड़ी अंदर।

GeM और GFR के नियमों से टकराव?
GeM और GFR स्पष्ट कहते हैं कि Qualification Criteria:
अनावश्यक रूप से प्रतिस्पर्धा सीमित नहीं करे Reasonable और Proportionate हो..कार्य की प्रकृति के अनुरूप हो..इतनी बड़ी मात्रा पर 80% Past Performance की शर्त को विशेषज्ञ अनुपातहीन (Disproportionate) बता रहे हैं।

MSME और “वोकल फॉर लोकल” पर चोट
सरकार जहां MSME को बढ़ावा और स्थानीय निर्माताओं की भागीदारी की बात करती है, वहीं इतनी कठोर शर्तें स्थानीय इकाइयों को बाहर कर देती हैं। आरोप है कि इससे केवल बड़े, बाहरी या पहले से सेट सप्लायरों को सीधा लाभ मिलता है—जो “वोकल फॉर लोकल” की भावना के उलट है।
टेंडर टेलरिंग की आशंका क्यों?
सूत्रों के अनुसार, जब एक साथ— Q2 कैटेगरी का चयन…अतिरिक्त स्पेसिफिकेशन….80% जैसी अत्यधिक Past Performance
लागू की जाती है, तो यह स्थिति Restrictive Tender Conditions और बिड टेलरिंग की आशंका को जन्म देती है।

सवालों के घेरे में खरीद प्रक्रिया
42,688 यूनिट के बिड पर 80% (34,150 यूनिट) Past Performance की शर्त— न तो उचित है न तर्कसंगत न ही GeM की निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा नीति के अनुरूप यह शर्त छत्तीसगढ़ के लगभग सभी स्थानीय फर्नीचर निर्माताओं को बाहर कर देती है—जो गंभीर आपत्ति का विषय है।
अब मांग क्या?
शर्तों की तत्काल समीक्षा
स्वतंत्र जांच
MSME हितों के अनुरूप यथोचित संशोधन दोषी पाए जाने पर जवाबदेही तय
सवाल साफ है: क्या GeM पोर्टल पर सरकारी खरीदी में पारदर्शिता से समझौता हो रहा है? और क्या वाकई एक ही कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को मोड़ा जा रहा है?
— जारी है पड़ताल
