मूक पत्रिका आशीष कंठले रायपुर – छत्तीसगढ़ में आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त मंत्री ने वर्ष 2026–27 का बजट पेश करते हुए इसे ‘संकल्प’ का नाम दिया, लेकिन इसी बजट के दावों पर नवा रायपुर की सड़कों ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस बजट में विकास, अधोसंरचना और बेहतर सड़कों के वादे किए गए, उसी प्रदेश की राजधानी क्षेत्र नवा रायपुर में भ्रष्टाचार खुलेआम सड़कों पर उतर आया है।
चमचमाती सड़कें खोदकर ‘विकास’ की लूट
नवा रायपुर में अच्छी हालत वाली नई सड़कों को बार-बार खोदा जा रहा है। कहीं पाइपलाइन, कहीं केबल, तो कहीं पैचवर्क के नाम पर करोड़ों रुपए का खेल चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिन इलाकों में सड़कें पूरी तरह सही हैं, वहीं बार-बार खुदाई कर फाइलों में काम दिखाया जा रहा है, जबकि प्रदेश के कई जिलों में लोग गड्ढों भरी सड़कों पर जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर हैं।
अफसर बेलगाम, मंत्री मौन
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण और मरम्मत में घटिया सामग्री का उपयोग,बार-बार एक ही सड़क पर काम,बिना जरूरत खुदाई,समय पर सड़क दोबारा न बनाना…सब कुछ खुलेआम हो रहा है।क्या अफसरों को किसी का डर नहीं? ना जांच, ना कार्रवाई… और जिम्मेदार मंत्री पूरी तरह खामोश!
जनता के टैक्स का पैसा कब तक बर्बाद?
यह पैसा सरकार का नहीं, जनता के टैक्स का है। फिर सवाल उठता है—
कब तक विकास के नाम पर लूट चलती रहेगी? कब होगी सड़क घोटालों की निष्पक्ष जांच? जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई कब होगी?
‘संकल्प’ बजट के दावों के बीच नवा रायपुर की सड़कें सरकार के सिस्टम पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। अगर अब भी जवाबदेही तय नहीं हुई, तो यह साफ है कि विकास नहीं, भ्रष्टाचार ही सरकार की असली प्राथमिकता बनता जा रहा है।
