मूक पत्रिका कवर्धा– फूड डिपार्टमेंट के अंतर्गत नान (नागरिक आपूर्ति निगम) से जुड़ा एक और शर्मनाक और चौंकाने वाला कारनामा सामने आया है। विकासखंड बोड़ला के ग्राम कापा में राशन चावल की गुणवत्ता को लेकर उठा सवाल अब सीधे विभागीय मिलीभगत और भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है।
बोरे से निकला नमक-आटा, सिस्टम बोला—सब ठीक है!
ग्रामीणों के मुताबिक, बोड़ला गोदाम से आए चावल के बोरे के भीतर प्लास्टिक की झिल्ली में नमक और आटा मिला। यह कोई छोटी चूक नहीं, बल्कि राशन व्यवस्था के साथ खुला खिलवाड़ है। शिकायत के बाद मौके पर क्वालिटी इंस्पेक्टर पुष्पराज कश्यप को बिना किसी लिखित आदेश के जांच के लिए भेज दिया गया—यानी शुरुआत से ही खानापूर्ति।
“एक बोरे में पन्नी से कुछ नहीं होता”—जनता से बदसलूकी
जांच के नाम पर पहुंचे इंस्पेक्टर ने ग्रामीणों से कथित तौर पर कहा “एक बोरे में पन्नी निकलने से कुछ नहीं होता”। जब ग्रामीण भड़के, तो इंस्पेक्टर मौके से निकल भागा।
हटाने का ढोंग, लौटाने का खेल!
सूत्र बताते हैं कि घटना के बाद ग्रामीणों को क्वालिटी इंस्पेक्टर को हटाने का मौखिक आश्वासन देकर शांत कराया गया। लेकिन पांच महीने बाद उसी इंस्पेक्टर को फिर से इसी जिले में पदस्थ कर दिया गया!
आखिर कौन-सी मजबूरी थी? या फिर भारी लेन-देन ने रास्ता आसान कर दिया?
बड़ा आरोप: क्या विभाग दोहराव चाहता है? क्या फूड डिपार्टमेंट ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति चाहता है? क्या गरीबों के राशन के साथ खेल करने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है?
