वन अधिकार अधिनियम के तहत 12,434 व्यक्तिगत और 2,831 सामुदायिक प्रमाण पत्र जारी
दैनिक मूक पत्रिका बीजापुर/आशीष पदमवार । आदिवासी विकास विभाग बीजापुर ने वनवासियों को उनके परंपरागत अधिकारों का हक दिलाने में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। वर्ष 2006 से 2025 तक जिले में कुल 15,265 वन अधिकार प्रमाण पत्र पात्र हितग्राहियों को प्रदान किए गए हैं। इनमें 12,434 व्यक्तिगत और 2,831 सामुदायिक प्रमाण पत्र शामिल हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रमाण पत्र वितरण की शुरुआत वर्ष 2008 से हुई थी। इस अवधि में वर्ष 2011 में सर्वाधिक 2,477 व्यक्तिगत प्रमाण पत्र जारी हुए, जबकि वर्ष 2020 में कुल 3,067 प्रमाण पत्र (1,566 व्यक्तिगत और 1,501 सामुदायिक) वितरित किए गए — जो हाल के वर्षों में सबसे अधिक है। नवीनतम जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में 230 और वर्ष 2025 में अब तक 390 व्यक्तिगत वन अधिकार प्रमाण पत्र पात्र लाभार्थियों को दिए जा चुके हैं।
सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग बीजापुर ने बताया कि वन अधिकार अधिनियम के तहत पात्र जनजातीय परिवारों को उनके परंपरागत वनाधिकारों की मान्यता और संरक्षण देने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। उन्होंने कहा वनवासियों को उनकी जमीन पर मालिकाना हक दिलाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। शेष पात्र आवेदनों का शीघ्र निराकरण कर प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे।”
वन अधिकार अधिनियम, 2006 का उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों और परंपरागत वनवासियों को उनके लंबे समय से उपयोग में रही वन भूमि पर कानूनी स्वामित्व प्रदान करना है, ताकि वे अपने आजीविका साधनों और पारंपरिक जीवन शैली को सुरक्षित रख सकें।
