पुनर्वास केंद्र में भाई-बहनों ने मनाया रक्षाबंधन, कई युवाओं के लिए नई जिंदगी का पहला पर्व
बीजापुर। माओवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे पुनर्वासित युवाओं के लिए इस बार रक्षाबंधन का पर्व नई उम्मीद और आत्मीयता लेकर आया। बीजापुर के पुनर्वास केंद्र में भाई-बहनों ने साथ मिलकर रक्षाबंधन मनाया। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, तिलक लगाया और मिठाई खिलाई। भाइयों ने भी बहनों की रक्षा और सम्मान का संकल्प लिया।
कई युवाओं के लिए यह नई जिंदगी का पहला रक्षाबंधन था। कभी भय और हिंसा के माहौल में रहे इन युवाओं ने इस बार सामान्य वातावरण में परिवार और अपनों के साथ त्योहार मनाया। आयोजन के दौरान भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता साफ नजर आई।

राखी के साथ लौटे रिश्तों के रंग
रक्षाबंधन कार्यक्रम के दौरान बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुरक्षित और सुखद भविष्य की कामना की। भाइयों ने भी बहनों का साथ निभाने का संकल्प लिया। लंबे समय बाद सामान्य माहौल में पर्व मनाने का अवसर मिलने से पुनर्वासित युवाओं में उत्साह दिखाई दिया। इन युवाओं के लिए यह पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि परिवार और समाज के साथ दोबारा जुड़ने का अवसर भी रहा।
मुख्यधारा में लौटकर भविष्य बनाने की कोशिश
माओवाद छोड़कर लौटे युवाओं को पुनर्वास नीति के तहत सामान्य जीवन में स्थापित करने के लिए विभिन्न अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्हें स्वरोजगार, कौशल विकास और शिक्षा जैसी गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पुनर्वासित युवाओं का कहना है कि वे अब हिंसा से दूर रहकर परिवार और समाज के बीच सम्मान तथा सुरक्षा के साथ जीवन जीना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
रक्षाबंधन के अवसर पर पुनर्वासित युवाओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि पुनर्वास नीति के माध्यम से उन्हें नई जिंदगी शुरू करने का अवसर मिला है। युवाओं ने कहा कि अब वे अपने भविष्य को बेहतर बनाने के साथ परिवार और समाज के लिए सकारात्मक भूमिका निभाना चाहते हैं।

जिंदगी का पहला रक्षाबंधन : भय से विश्वास की ओर बढ़ते कदम
पुनर्वास केंद्र में मनाया गया रक्षाबंधन कई युवाओं के लिए नई जिंदगी में पहला त्योहार रहा। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और भाइयों ने भी उनके साथ व सुरक्षा का संकल्प लिया। आयोजन में परिवार और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की उम्मीद नजर आई।
