रायपुर – गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ में ग्रामोद्योग, खादी, हाथकरघा और रेशम क्षेत्र को नई गति देने वाली कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की गईं। खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में ‘अमारी सिल्क’ यानी अहिंसा सिल्क ब्रांड का शुभारंभ किया गया। इस पहल से प्रदेश के 11 जिलों के 13 महिला स्व-सहायता समूहों की 360 महिलाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित विभिन्न बोर्ड-आयोगों के अध्यक्ष, विधायक और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

खादी को मिला नया आधार
कार्यक्रम में कुंवरगढ़, जिला रायपुर में 55 लाख रुपये की लागत से निर्मित खादी उत्पादन केंद्र और अंबिकापुर में 20 लाख रुपये की लागत से बने प्रीमियम खादी सेल्स आउटलेट का वर्चुअल शुभारंभ किया गया। वहीं जशपुर, कोरबा, बस्तर और सुकमा की विशेष पिछड़ी जनजातियों की 30 महिलाओं को सोलर चरखे वितरित किए गए।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले 2 बुनकरों और 2 कत्तिनों को 21-21 हजार रुपये की प्रोत्साहन एवं सम्मान राशि दी गई। मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 100 से अधिक हितग्राहियों को 50 लाख रुपये की अनुदान राशि वितरित की गई, जबकि कारीगरों को प्रशिक्षण वृत्ति का लाभ भी दिया गया।
बुनकरों के लिए 86.96 लाख की सहायता
हाथकरघा प्रभाग ने भी बुनकरों के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं। बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास केंद्रों से जुड़े 80 हितग्राहियों के नवीन बुनाई प्रशिक्षण की शुरुआत की गई।
उन्नत उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 122 हितग्राहियों को 21.96 लाख रुपये और 26 बुनकरों को व्यक्तिगत वर्कशेड-सह-आवास के लिए 65 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई। इस तरह बुनकरों के लिए कुल 86.96 लाख रुपये की सहायता का रास्ता साफ हुआ।
छत्तीसगढ़ के हाथकरघा उत्पादों को देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचाने के लिए ‘बिलासा हैंडलूम’ की व्यावसायिक वेबसाइट का भी लोकार्पण किया गया। इससे प्रदेश के बुनकरों के उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री को नई गति मिलने की उम्मीद है।
‘अमारी सिल्क’ बनेगा महिलाओं की आर्थिक ताकत
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘अमारी सिल्क’ रहा। कोसा फलों से तितलियों के स्वतः बाहर निकलने के बाद तैयार होने वाले अहिंसक धागे को ‘अमारी सिल्क’ यानी अहिंसा सिल्क ब्रांड के रूप में लॉन्च किया गया।
यह पहल पर्यावरण और जीव संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। इससे 11 जिलों के 13 महिला स्व-सहायता समूहों की 360 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।
वहीं बस्तर संभाग में टसर कीट पालन और धागाकरण के क्षेत्र में 360 प्रशिक्षार्थियों का प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इसके लिए करीब 29.49 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
टसर धागों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और बिचौलियों की भूमिका कम करने के उद्देश्य से ‘रेशम सेतु’ विक्रय मंच भी तैयार किया जा रहा है। इससे 79 महिला समूहों को जोड़ने की योजना है।
विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं को भी मिला रोजगार का रास्ता
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा ने बताया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं को रायपुर जिले के कुंवरगढ़ स्थित प्रशिक्षण केंद्र में हथकरघा और खादी के बचत कपड़े से खिलौने बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इस पहल से प्रदेश की अति पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं के लिए रोजगार और स्वावलंबन के नए अवसर तैयार होंगे।
कार्यक्रम में विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं ने संस्कृत में वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण की विशेष प्रस्तुति दी। वहीं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के संघर्ष और महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित नाट्य प्रस्तुति ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के विद्यार्थियों ने भरतनाट्यम के माध्यम से महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
गांधी जयंती पर आयोजित यह आयोजन खादी, ग्रामोद्योग, हाथकरघा और रेशम के माध्यम से रोजगार, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में छत्तीसगढ़ की नई पहल के रूप में सामने आया।
