AVFO नरोत्तम समरथ को ‘एकतरफा रिलीव’, करते हुए वेतन आहरण तत्काल प्रभाव से रोका गया, सचिव ने मांगा अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव
स्वयं के व्यय पर 2 बार ट्रांसफर कराकर भी 30 सालों से एक ही जगह जमा था AVFO, 40 दिन तक मंत्री का फरमान दबाने पर उपसंचालक की मनमानी पड़ी भारी, सस्पेंशन की तलवार लटकी
बीजापुर। पशुपालन विभाग में अधिकारियों की मनमानी और आपसी सांठगांठ का एक बड़ा प्रशासनिक मामला बेनकाब हो गया है। विभागीय मंत्री रामविचार नेताम के स्पष्ट आदेशों का उल्लंघन करने वाले उपसंचालक डॉ राजीव शर्मा और 30 सालों से एक ही स्थान पर मलाई काट रहे सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी नरोत्तम समरथ के नेटवर्क पर शासन का बड़ा चाबुक चला है।
शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए AVFO नरोत्तम समरथ को तत्काल प्रभाव से ‘एकतरफा कार्यमुक्त’ कर दिया है। इसके साथ ही शासन ने मंत्री के आदेश की अवहेलना करने पर उपसंचालक डॉ राजीव शर्मा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव विभाग से तलब कर लिया है।

अवर सचिव द्वारा जारी आदेश
30 साल से जमा था AVFO, खुद के व्यय पर 2 बार ट्रांसफर का नाटक..
मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि AVFO नरोत्तम समरथ पिछले 30 वर्षों से एक ही जगह पर पैर जमाए बैठा था। उसने नाटकीय अंदाज में कागजों पर खुद के व्यय पर 2 बार अपना ट्रांसफर करवाया, लेकिन तत्कालीन उपसंचालकों से साठगांठ कर कभी अपनी नई पदस्थापना पर गया ही नहीं।
पहली बार 2016 में अपना स्थानांतरण स्वैच्छिक आधार पर पशु औषधालय बकावंड जिला बस्तर हुआ और स्थानांतरण के पश्चात इनके रिलीवर तो आये लेकिन ये नहीं गए। इसके साथ ही संबंधित AVFO उपसंचालकों से साठगांठ कर पिछले 20 सालों से नियम विरुद्ध उपसंचालक कार्यालय में संलग्न होकर के मलाईदार शाखा के प्रभारी बने बैठे हैं। इस दौरान उस पर भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के कई आरोप लगे। शिकायतों का पुलिंदा जब पशुपालन मंत्री रामविचार नेताम तक पहुंचा, तो उन्होंने मामले को बेहद गंभीरता से लिया।

मंत्री द्वारा जारी आदेश
मंत्री का कड़ा आदेश: 26 जून को दिए थे रिलीविंग के निर्देश
पशुपालन मंत्री रामविचार नेताम ने बीते 26 जून को सख्त आदेश जारी करते हुए AVFO नरोत्तम समरथ को तत्काल रिलीव करने का निर्देश दिया था। मंत्री ने अपने आदेश में यह स्पष्ट चेतावनी भी दी थी कि ‘यदि AVFO को रिलीव नहीं किया जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार उपसंचालक पर सीधी कार्रवाई की जाएगी।’
लेकिन मंत्री के इस सख्त चेतावनी वाले आदेश के बावजूद उपसंचालक राजीव शर्मा ने मंत्री के फरमान को 40 दिनों तक ठंडे बस्ते में डाले रखा और AVFO को कुर्सी से हिलने तक नहीं दिया।
शासन का अंतिम प्रहार : वेतन आहरण पर तत्काल रोक।
मंत्री के आदेश के 40 दिन बीत जाने के बाद जब मामला तूल पकड़ने लगा, तो शासन स्तर से सचिव ने सीधे हस्तक्षेप किया। सचिव द्वारा जारी आदेश में 3 सबसे बड़े कड़े निर्देश दिए गए हैं –
