रायपुर – छत्तीसगढ़ के जंगल अब सिर्फ हरियाली का पर्याय नहीं, बल्कि रोजगार, आजीविका, पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण की नई कहानी लिख रहे हैं। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने मंगलवार को सरकार के ढाई साल के कामकाज का खाका सामने रखते हुए दावा किया कि प्रदेश “हरित छत्तीसगढ़–समृद्ध छत्तीसगढ़” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। किसानों के खेतों में करोड़ों पौधे लगाने से लेकर बस्तर के जंगलों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने तक सरकार ने कई उपलब्धियां गिनाईं।
नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में पत्रकार वार्ता के दौरान मंत्री कश्यप ने कहा कि सरकार की वन नीति का मकसद केवल जंगलों को बचाना नहीं, बल्कि वनवासियों की आय बढ़ाना, किसानों को अतिरिक्त आमदनी देना, महिलाओं और युवाओं को रोजगार से जोड़ना तथा जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करना भी है।
62 हजार एकड़ जमीन पर 3.67 करोड़ पौधे
सरकार ने किसानों की आय और हरियाली को एक साथ जोड़ने के लिए किसान वृक्ष मित्र योजना को आगे बढ़ाया है। मंत्री के मुताबिक पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ कृषि भूमि पर 3.675 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए।
योजना के तहत 5 एकड़ तक की भूमि पर 100 प्रतिशत और 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में यही पौधे किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बनेंगे।
तेंदूपत्ता संग्राहकों के खातों में पहुंचा करोड़ों का पैसा
छत्तीसगढ़ में जंगल और वनवासियों के रिश्ते को मजबूत करने के लिए तेंदूपत्ता संग्राहकों को भी सरकार ने बड़ी राहत दी है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा है।
वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों ने 13.85 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया, जिसके बदले 757 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया। वहीं 7.14 लाख संग्राहकों को 153 करोड़ रुपये प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया गया।
महिला संग्राहकों को 12.40 लाख चरण पादुका वितरित की जा चुकी हैं, जबकि वर्ष 2026 में 12.38 लाख पुरुष संग्राहकों को चरण पादुका देने का प्रस्ताव है।
वनोपज बनी हजारों परिवारों की ताकत
समर्थन मूल्य पर 36,580 क्विंटल वनोपज खरीदी गई और संग्राहकों को 16.66 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इससे 13 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हुए।
राजमोहिनी देवी सुरक्षा योजना के तहत 1,862 प्रकरणों में 26.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के 8,533 विद्यार्थियों को 12.07 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति दी गई।अबूझमाड़ में वर्ष 2026 में 13 नए तेंदूपत्ता फड़ शुरू करना भी सरकार की उपलब्धियों में शामिल है।
70 हजार से ज्यादा महिलाओं को मिला आजीविका का सहारा
प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन और पीएम जनमन योजना के जरिए लघु वनोपज के संग्रहण और प्रसंस्करण को महिलाओं की आजीविका से जोड़ा गया है। 6 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों की 70 हजार से ज्यादा महिलाएं इससे लाभान्वित हुई हैं।
वन धन केंद्रों से जुड़े महिला समूहों को 5 करोड़ रुपये से अधिक कमीशन मिला है। इन केंद्रों पर 181 प्रकार के हर्बल उत्पाद तैयार किए गए, जिनका कुल मूल्य 4.42 करोड़ रुपये बताया गया है।
बस्तर में शांति के साथ रोजगार के नए दरवाजे
मंत्री कश्यप ने कहा कि बस्तर के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने के बाद अब वन विभाग भी उन इलाकों में अपने काम का विस्तार कर रहा है, जहां पहले पहुंच मुश्किल थी।
दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर के दूरस्थ वन क्षेत्रों में इमारती लकड़ी, बांस विदोहन और अन्य वानिकी कार्य प्रस्तावित हैं।
इन कार्यों से करीब 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार पैदा होने का अनुमान है। सरकार का दावा है कि इससे स्थानीय लोगों को गांव के आसपास रोजगार मिलेगा और पलायन पर भी रोक लगेगी।
वनों के बीच विकास की राह—सड़क से मोबाइल टावर तक
दूरस्थ वन क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाने पर भी सरकार ने जोर दिया है।
पीएम जनमन योजना के तहत 20 प्रकरणों में 58.002 हेक्टेयर वन क्षेत्र और 99.995 किलोमीटर मार्ग के लिए अनुमति दी गई। वहीं वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(2) के तहत 417 प्रकरणों में करीब 1,300 से 1,400 किलोमीटर मार्ग के लिए अनुमति जारी की गई।
बीएसएनएल के 62 टावरों में से 59 टावरों को महज 70 दिनों में अनुमति दिए जाने का दावा भी मंत्री ने किया।
बाघों की संख्या 18 से बढ़कर 35
वन्यजीव संरक्षण के मोर्चे पर भी छत्तीसगढ़ ने बड़ी उपलब्धि का दावा किया है। मंत्री के अनुसार वर्ष 2022 में प्रदेश में बाघों की संख्या 18 थी, जो 2026 में बढ़कर 35 हो गई। यानी करीब 94 प्रतिशत की वृद्धि।
2,829.387 वर्ग किलोमीटर में फैला गुरु घासीदास-तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बन चुका है। बांधवगढ़ से तीन बाघिनों के ट्रांसलोकेशन की अनुमति भी मिल चुकी है और जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
बारनवापारा में कृष्ण मृगों की संख्या 200 पार
बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्या भी बढ़ी है। मंत्री के मुताबिक इनकी संख्या 77 से बढ़कर 200 के पार पहुंच गई है। इस उपलब्धि की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी सराहना की थी।
इंद्रावती में वन भैंसों की संख्या 14 से 17 के बीच प्राकृतिक रूप से मौजूद है, जबकि असम से लाए गए वन भैंसों की संख्या 6 से बढ़कर 11 हो गई है।
हाथियों से टकराव रोकने तकनीक का सहारा
मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के लिए ‘गज संकेत’ ऐप और ‘गजरथ यात्रा’ शुरू की गई है। प्रदेश में 90 हाथी मित्र दलों के 545 प्रशिक्षित सदस्य गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
12 अगस्त 2026 को दरभा में ‘गज संकेत’ ऐप का विमोचन किया गया। सरकार के मुताबिक इस पहल को राज्य स्तरीय सुशासन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
ईको-टूरिज्म से युवाओं को रोजगार
छत्तीसगढ़ में 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 50 से अधिक केंद्र स्वावलंबी हो चुके हैं।
बस्तर का धुड़मारास सामुदायिक पर्यटन का मॉडल बनकर उभरा है। यहां स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के साथ पांच कमरों का ‘धुवाडेरा’ होम-स्टे तैयार किया गया है।
महासमुंद के शिशुपाल ईको ट्रेल पर 45 लाख रुपये खर्च कर विकास कार्य किए गए हैं, जिससे 832 मानव-दिवस रोजगार और 15 नियमित आजीविका के अवसर बने।
बस्तर की संस्कृति बचाने 572 देवगुड़ियों का संरक्षण
सरकार ने बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का भी दावा किया है। पिछले ढाई वर्षों में 19.05 करोड़ रुपये खर्च कर 572 देवगुड़ियों का निर्माण और जीर्णोद्धार कराया गया।
नारायणपुर के ग्राम गढ़बेंगाल में पारंपरिक सांस्कृतिक संस्था ‘घोटुल’ के संरक्षण की दिशा में भी काम किया गया है।
कांगेर घाटी को मिली वैश्विक पहचान
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 2025 में यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया। यहां 35 जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे करीब 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का दावा किया गया है।
अब जंगल की आग पर 5 से 10 मिनट में अलर्ट
वनाग्नि से निपटने के लिए अत्याधुनिक फॉरेस्ट फायर अलर्ट एवं मॉनिटरिंग सिस्टम काम कर रहा है। मंत्री के अनुसार पहले आग लगने के बाद प्रतिक्रिया में एक से दो घंटे तक लग जाते थे, लेकिन अब नियर रियल टाइम अलर्ट के जरिए रिस्पॉन्स टाइम घटकर 5 से 10 मिनट रह गया है। इसे बीट स्तर तक ले जाने की तैयारी है।
डिजिटल हुआ वन विभाग, ऑनलाइन भुगतान पर जोर
वन विभाग की भुगतान व्यवस्था को ई-कुबेर और ई-कोष से जोड़ा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,520 करोड़ रुपये से अधिक का ऑनलाइन भुगतान किया गया, जबकि 2026-27 में अगस्त तक 209 करोड़ रुपये ऑनलाइन भुगतान का दावा किया गया।
SPARROW में 8,975 अधिकारी-कर्मचारियों को ऑनबोर्ड किया गया है। वहीं eHRMS में 32,869 और iGOT कर्मयोगी में 9,230 अधिकारी-कर्मचारी जुड़े हैं। मुख्यालय से वनमंडल स्तर तक ई-ऑफिस को शत-प्रतिशत लागू किए जाने की जानकारी दी गई।
‘हरित’ के साथ ‘समृद्ध’ छत्तीसगढ़ का लक्ष्य
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सरकार के लिए जंगल सिर्फ पेड़-पौधों का समूह नहीं, बल्कि वनवासियों की आजीविका, जनजातीय संस्कृति, वन्यजीव और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार हैं। सरकार का लक्ष्य जंगलों को बचाने के साथ किसानों की आय बढ़ाना, महिलाओं और युवाओं को रोजगार देना, बस्तर में विकास की रफ्तार तेज करना और वन्यजीवों को सुरक्षित आवास देना है।
सरकार के इन आंकड़ों को देखें तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की वन नीति का फोकस साफ दिखाई देता है—जंगल भी बचेंगे, रोजगार भी बढ़ेगा और वनवासियों की जिंदगी में भी समृद्धि आएगी।
