विधायक मंडावी बोले- 10 छोटे नक्सली दोषी, बड़े नेतृत्व और राजनीतिक षड्यंत्र की जांच नहीं हुई
बीजापुर। झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने जांच पर सवाल उठाए हैं। बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने रविवार को प्रेसवार्ता में कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान है, लेकिन झीरम हमले की पूरी साजिश अब भी सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना केवल छोटे नक्सलियों के जरिए संभव नहीं थी। बड़े नक्सली नेतृत्व और राजनीतिक षड्यंत्र की जांच जरूरी है।
मंडावी ने कहा कि 23 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए हमले में नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार समेत 32 लोगों की हत्या हुई थी। एनआईए ने जिन 10 लोगों को गिरफ्तार किया, उन्हें दोषी ठहराया गया है, लेकिन जांच में बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका स्पष्ट नहीं हुई।

एफआईआर में नाम, बाद में चार्जशीट से हटे
मंडावी ने दावा किया कि शुरुआती एफआईआर में नक्सली नेता गणपति और रमन्ना के नाम शामिल थे। 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी हुए थे, लेकिन बाद की चार्जशीट से कुछ बड़े नाम हटा दिए गए। उन्होंने सवाल किया कि ऐसा क्यों किया गया?
उन्होंने कहा कि कई वांछित नक्सली बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। चैतू, रूपेश उर्फ मोल्ला राजिरड्डी, निर्मला उर्फ सुमित्रा, भूपति उर्फ सोनू और सुजाता जैसे नामों का उल्लेख करते हुए मंडावी ने पूछा कि झीरम मामले में इनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई।
सुरक्षा हटाने और रूट बदलने पर सवाल
विधायक ने कहा कि परिवर्तन यात्रा से सुरक्षा क्यों हटाई गई? यात्रा का रूट किसके कहने पर बदला गया? हमले की योजना किसने बनाई? इन सवालों के जवाब सामने आने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि हमले में घायल और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी पर्याप्त रूप से दर्ज नहीं किए गए।
मंडावी ने छत्तीसगढ़ पुलिस की एसआईटी की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि एनआईए ने एसआईटी की जांच रोक दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी राज्य सरकार ने जांच शुरू नहीं की।
भाजपा पर लगाया सच दबाने का आरोप
मंडावी ने भाजपा की तत्कालीन सरकार और एनआईए की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि झीरम का पूरा सच सामने आए। हालांकि, प्रेसवार्ता के दौरान भाजपा की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
कांग्रेस ने झीरम नरसंहार के राजनीतिक षड्यंत्र, सुरक्षा हटाने, रूट बदलने और बड़े नक्सली नेतृत्व की भूमिका की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
प्रेसवार्ता में लालू राठौर, शंकर कुड़ियम, आर. वेणुगोपाल राव, प्रवीण डोंगरे, राजेश जैन, ज्योति कुमार और जितेंद्र हेमला,प्रवीण डोंगरे समेत कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मंडावी के प्रमुख सवाल
- यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई?
- रूट किसके कहने पर बदला गया?
- बड़े नक्सलियों के नाम चार्जशीट से क्यों हटे?
- सरेंडर कर चुके नक्सलियों से पूछताछ क्यों नहीं हुई?
- घायलों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान क्यों नहीं लिए गए?
- राजनीतिक षड्यंत्र की जांच कब होगी?
