रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सियासत गरमा गई है। सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष दीपक बैज और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल आमने-सामने हैं। बैज ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए स्वास्थ्य मंत्री को अस्पताल निरीक्षण की खुली चुनौती दी, तो मंत्री जायसवाल ने भी चुनौती स्वीकार करते हुए पलटवार किया है।
बैज ने उठाए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
दीपक बैज ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के किसी भी अस्पताल में जाकर वास्तविक स्थिति देखी जा सकती है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को अस्पतालों का दौरा कर व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत देखने की चुनौती दी।
बैज का रुख साफ है कि स्वास्थ्य सेवाओं का आकलन केवल सरकारी दावों या बैठकों के आधार पर नहीं, बल्कि अस्पताल पहुंचकर मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत तथा मौके की व्यवस्थाओं को देखकर किया जाना चाहिए।
मंत्री जायसवाल ने कहा- अस्पताल आप चुनिए
बैज की चुनौती पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी जवाब देने में देर नहीं की। उन्होंने कहा कि दीपक बैज बस्तर, रायपुर या प्रदेश के किसी भी अस्पताल को चुन सकते हैं, वह उनके साथ वहां जाने के लिए तैयार हैं।
मंत्री ने यह भी कहा कि वे केवल स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक मित्र के रूप में भी बैज के साथ अस्पताल का दौरा करने के लिए तैयार हैं। इस बयान के बाद अब दोनों नेताओं के बीच अस्पताल दौरे की चुनौती सियासी चर्चा का विषय बन गई है।
जमीनी निरीक्षण पर टिकी निगाहें
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस जहां सरकार से जवाब मांग रही है, वहीं सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और अस्पतालों की व्यवस्थाओं में सुधार की बात कही जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री इससे पहले भी प्रदेश के अलग-अलग अस्पतालों का निरीक्षण कर चुके हैं। अप्रैल 2025 में उन्होंने रायपुर के डीकेएस अस्पताल का औचक निरीक्षण कर मरीजों से बातचीत की थी और व्यवस्थाओं में कमियां मिलने पर सुधार के निर्देश दिए थे।
ऐसे में अब ताजा सियासी चुनौती के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि दीपक बैज और श्याम बिहारी जायसवाल आखिर कब एक साथ अस्पताल पहुंचेंगे और कौन सा अस्पताल इस सियासी निरीक्षण का केंद्र बनेगा?
फिलहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का मुद्दा एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र में आ गया है। बैज के सवाल और जायसवाल के जवाब के बाद आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और तेज होने के संकेत हैं।
