छत्तीसगढ़ – रायपुर रेंज में अपराध नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा ने शनिवार को रेंज के सभी पुलिस अधीक्षकों, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों और राजपत्रित अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में साफ संदेश दिया गया कि अब केवल अपराधियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि उनके पूरे आर्थिक नेटवर्क पर भी प्रहार किया जाएगा।
बैठक में एक वर्ष से अधिक समय से लंबित अपराध, ब्लाइंड मर्डर, चिटफंड और अन्य गंभीर मामलों की प्रकरणवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को तय समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण विवेचना पूरी करने के निर्देश दिए गए। राजपत्रित अधिकारियों को गंभीर मामलों की सीधे मॉनिटरिंग करने और विवेचना से लेकर न्यायालयीन कार्रवाई तक व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने को कहा गया।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन रहा। अधिकारियों को मनी ट्रेल, बैंकिंग और डिजिटल ट्रांजैक्शन एनालिसिस, बेनिफिशियल ओनरशिप, अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने का प्रशिक्षण दिया गया। विशेष रूप से NDPS और संगठित अपराधों में केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि सप्लायर, फाइनेंसर, ट्रांसपोर्टर और पूरे नेटवर्क को चिन्हित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। SAFEMA के तहत संपत्ति फ्रीज और जब्ती की प्रक्रिया तेज करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में पुलिस संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी विशेष चर्चा हुई। मानव संसाधन, वाहनों और तकनीकी उपकरणों के प्रभावी उपयोग, प्राथमिकता आधारित तैनाती और बेहतर समन्वय के माध्यम से ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने की रणनीति तय की गई।
यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए CCTV, AI आधारित तकनीक और डेटा-ड्रिवन एनफोर्समेंट के जरिए चालानी कार्रवाई बढ़ाने के निर्देश दिए गए। साथ ही रेंज स्तर पर साइबर टास्क फोर्स के गठन और जटिल साइबर मामलों में रेंज साइबर थाना से तकनीकी सहयोग लेने की बात कही गई।
बैठक के अंत में IG अमरेश मिश्रा ने अधिकारियों से कहा कि ट्रांसफॉर्मेशनल लीडरशिप, तकनीकी दक्षता, टीम वर्क और व्यक्तिगत जवाबदेही के माध्यम से पुलिसिंग में गुणात्मक सुधार लाया जाए, ताकि अपराध नियंत्रण के साथ जनता का पुलिस पर भरोसा और मजबूत हो।
