बीजापुर। बीजापुर की चिकटराज देव गुड़ी में मंगलवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दशहरा जात्रा मनाई गई। माता मावली और बाबा चिकटराज देव की पूजा-अर्चना के बाद सिराहाओं ने देव नृत्य किया। विभिन्न देवी-देवताओं को मानदान अर्पित कर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया।
जात्रा की शुरुआत माता मावली की पूजा से हुई। इसके बाद बीजापुर के आराध्य बाबा चिकटराज देव की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। आगे धरमराज देव, बड़े कुंवर, कोंडराज देव, भीम देव और माता कारी कंकालीन को मानदान अर्पित किया गया। गांव की ओर से बाबा चिकटराज देव को मन्नतों और मान स्वरूप मानदान दिया गया।

परंपराओं के साथ हुआ जात्रा का समापन
धार्मिक अनुष्ठानों के क्रम में भीतर गढ़, गढ़ गढ़मुंडी और घाट दरवाजा को मान अर्पित किया गया। अंत में मोदूल गुड़ी में गांव दई माता की पूजा-अर्चना और मानदान के साथ जात्रा का समापन हुआ।
आयोजन में गोरना, भोषागुड़ा, तुरनार, धनोरा, मलगोड़ा, मुरकीनार और कोतापाल सहित आसपास के गांवों के पेरमा, गायता, वड्डे और ग्राम प्रमुख शामिल हुए। दशहरा जात्रा बस्तर की आदिवासी देव संस्कृति, पेन-पुरखाओं के प्रति आस्था और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का प्रतीक है। ऐसे आयोजन सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के साथ सामाजिक एकता को भी मजबूत करते हैं।
जात्रा में निभाई गईं परंपराएं
- माता मावली और बाबा चिकटराज देव की पूजा-अर्चना।
- सिराहाओं ने प्रस्तुत किया पारंपरिक देव नृत्य।
- विभिन्न देवी-देवताओं को अर्पित किया गया मानदान।
- आसपास के गांवों के प्रतिनिधियों ने की सहभागिता
- जात्रा आदिवासी देव संस्कृति, पेन-पुरखाओं के प्रति आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
