मूक पत्रिका रायपुर – पुलिस कमिश्नरेट रायपुर की यातायात पुलिस ने सोमवार को स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान चलाते हुए शहर के विभिन्न स्कूलों के बाहर जांच की। इस दौरान करीब 61 नाबालिग छात्र-छात्राएं दोपहिया वाहन चलाते हुए पकड़े गए। सभी मामलों में बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर यातायात मुख्यालय, कालीबाड़ी में काउंसलिंग की गई और भविष्य में नाबालिगों को वाहन नहीं देने की सख्त समझाइश दी गई।
पुलिस उपायुक्त (यातायात) डॉ. अर्चना झा के मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। शहर के अलग-अलग स्कूलों के बाहर यातायात पुलिस की टीमों ने जांच के दौरान नाबालिग चालकों को रोका और उनके परिजनों को शाम 5 बजे काउंसलिंग सत्र में शामिल होने के लिए बुलाया।

काउंसलिंग कार्यक्रम में डीसीपी डॉ. अर्चना झा ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस का मकसद किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि बच्चों की जान की सुरक्षा करना है। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े वीडियो और प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना किस तरह गंभीर हादसों का कारण बन सकता है।
इस दौरान अभिभावकों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A की जानकारी भी दी गई। पुलिस ने बताया कि यदि कोई अभिभावक नाबालिग को वाहन चलाने देता है तो उसके खिलाफ 25 हजार रुपये तक का जुर्माना, तीन वर्ष तक की सजा और संबंधित नाबालिग के वयस्क होने के बाद भी निर्धारित अवधि तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किए जाने का प्रावधान है।
चूंकि अधिकांश मामलों में यह पहली बार की गलती थी, इसलिए बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें जागरूक किया गया और नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अभिभावकों की विस्तृत काउंसलिंग की गई।
यातायात पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे सुविधा के लिए नाबालिग बच्चों को दोपहिया या अन्य मोटर वाहन न दें। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए स्कूल बस, अधिकृत परिवहन या अन्य सुरक्षित विकल्पों का उपयोग करें।
यातायात पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया कि “हमारा उद्देश्य चालान करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा सुरक्षित स्कूल पहुंचे और सुरक्षित घर लौटे। सड़क सुरक्षा की शुरुआत परिवार की जिम्मेदारी से होती है।”
