मूक पत्रिका रायपुर – लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में छत्तीसगढ़ में छात्र आंदोलन तेज हो गया है। राजधानी रायपुर सहित धमतरी और बीजापुर में छात्रों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से तत्काल ठोस निर्णय लेने की मांग करते हुए कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य की लड़ाई है।
रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर बड़ी संख्या में छात्र और युवा एकत्र हुए। उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण युवाओं का विश्वास लगातार कमजोर हो रहा है। इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई।

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक पेपर लीक रोकने के लिए कड़ा कानून नहीं बनाया जाता और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किए जाते, तब तक उनका आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। उनका कहना था कि केवल आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा, सरकार को ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे।
इधर धमतरी में सामाजिक कार्यकर्ता मितेश जैन ने गांधी मैदान में एक दिवसीय अनशन कर सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति समर्थन जताया। वहीं बीजापुर में आदिवासी युवा छात्र संगठन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर वांगचुक की मांगों पर सकारात्मक पहल करने की अपील की।
प्रदर्शनकारियों ने देशभर में पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त रोक लगाने, परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग दोहराई। उनका कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर अब सरकार को निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए।
गौरतलब है कि आंदोलन के पहले दिन भी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर 500 से अधिक छात्र, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि जुटे थे। प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया था। अब आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
