सलवा जुडूम के दौरान बीजापुर आए परिवारों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, बेदखली और तोड़फोड़ रोकने की मांग
बीजापुर। नक्सल हिंसा से बचने के लिए दो दशक पहले गांव छोड़कर बीजापुर आए परिवार आज भी अपने घर-जमीन के स्थायी अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मंगलवार को नक्सल पीड़ित परिवारों ने स्थायी राजस्व पट्टे की मांग को लेकर नगर पालिका परिषद कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम (राजस्व) को ज्ञापन सौंपा गया। परिवारों ने पट्टा मिलने तक मकानों पर किसी भी तरह की तोड़फोड़ और बेदखली की कार्रवाई रोकने की मांग की है।
2005 में गांव छोड़ा, बीजापुर में बना लिया आशियाना
ज्ञापन में परिवारों ने बताया कि वर्ष 2005 में सलवा जुडूम के दौरान नक्सल हिंसा और भय के कारण उन्हें अपने गांव छोड़ने पड़े। इसके बाद वे बीजापुर पहुंचे और वार्ड क्रमांक 1, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 में मकान बनाकर रहने लगे। करीब 20 वर्ष से ये परिवार बीजापुर में ही मजदूरी और छोटे-मोटे काम कर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों का बचपन भी इसी शहर में बीता, लेकिन इतने वर्षों के बाद भी उन्हें स्थायी राजस्व पट्टा नहीं मिल पाया है।
नोटिस से परिवारों में असुरक्षा
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका की ओर से उनके मकानों को अवैध बताते हुए समय-समय पर घर खाली करने और मकान तोड़ने के नोटिस दिए जाते हैं। इससे परिवारों में भय का माहौल है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे अपनी इच्छा से किसी जमीन पर कब्जा करने नहीं आए थे, बल्कि नक्सल हिंसा से जान बचाकर बीजापुर पहुंचे थे। वर्षों से यहां रहने के बाद अब उनके सामने घर छिनने का खतरा पैदा हो गया है।

विधायक मंडावी ने सरकार से मांगा स्थायी समाधान
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि वर्ष 2005 से नक्सल पीड़ित परिवार बीजापुर में स्थायी रूप से रह रहे हैं। इनमें अधिकांश गरीब और मजदूर परिवार हैं, जो अलग-अलग वार्डों में मकान बनाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 20 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इन परिवारों को पट्टा नहीं मिलना चिंता का विषय है। सरकार को पीड़ित परिवारों को तत्काल स्थायी राजस्व पट्टा देना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि पट्टा मिलने तक किसी भी मकान को तोड़ने अथवा परिवारों को बेदखल करने की कार्रवाई नहीं की जाए।

परिवारों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष लालू राठौर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम, जिला पंचायत सदस्य नीना रावतिया, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमलेश कारम, पार्षद बबिता झाड़ी सहित कांग्रेस पदाधिकारी, पार्षद और बड़ी संख्या में नक्सल पीड़ित परिवार मौजूद रहे।
पीड़ित परिवारों की 2 प्रमुख मांगें :
- स्थायी पट्टा: वार्ड 1, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 में लंबे समय से रह रहे नक्सल पीड़ित परिवारों को राजस्व पट्टा दिया जाए।
- कार्रवाई पर रोक: पट्टा मिलने तक मकानों की तोड़फोड़ और बेदखली की कार्रवाई पूरी तरह रोकी जाए।
