2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता का किया विरोध
बीजापुर। टीईटी की अनिवार्यता, पुरानी पेंशन और पदोन्नति समेत शिक्षकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सुधीर गौतम को ज्ञापन सौंपा। बीजापुर के पर पहुंचे आयोग अध्यक्ष से मोर्चा के पदाधिकारियों ने बीआरसी कार्यालय में मुलाकात की। जिला सह संचालक कैलाश रामटेके के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने पहले उनका पुष्पगुच्छ से स्वागत किया और फिर अपनी मांगें रखीं।
मोर्चा ने ज्ञापन में कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून वर्ष 2010 में लागू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के संबंध में दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि कानून लागू होने की तारीख से ही उसका प्रभाव होना चाहिए। पूर्व की नियुक्तियों पर इसे लागू करने से लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने भविष्य को लेकर चिंता की स्थिति बन रही है।
मोर्चा ने इस संबंध में संसद में अध्यादेश लाकर कानून में संशोधन किए जाने की मांग की है। इसके साथ ही प्रथम नियुक्ति तिथि से पुरानी पेंशन देने, सभी प्रशिक्षित शिक्षकों को पदोन्नति का अवसर देने और वेतन विसंगति दूर करने की मांग भी रखी गई।
शिक्षकों की मांगों को आयोग अध्यक्ष ने ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने आगामी शिक्षा विभाग की बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा कर उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। शिक्षा आयोग शिक्षा और शिक्षकों से जुड़े विषयों पर समय-समय पर सरकार को अपना अभिमत देता है।
शिक्षको की प्रमुख मांगें
- टीईटी: 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता को लेकर पुनर्विचार।
- पुरानी पेंशन: प्रथम नियुक्ति तिथि से पुरानी पेंशन का लाभ।
- पदोन्नति: सभी प्रशिक्षित शिक्षकों को पदोन्नति का अवसर।
- वेतन विसंगति: शिक्षकों की वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करने की मांग।
- कानून में संशोधन: टीईटी से जुड़े प्रावधान में आवश्यक संशोधन की पहल।
मोर्चा पदाधिकारियों में वसीम खान, विजय चापड़ी, पुरुषोत्तम चंद्रकार, अरुण सिंह, राजेश मिश्रा, राजेश यालम, प्रदीप साहनी, रमन झा और आशीष पाण्डेय सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
