अभनपुर – सरकारी दफ्तरों के चक्कर, पंचायत में आवेदन और बार-बार गुहार… लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो कुर्रा गांव के ग्रामीणों ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया, जिसने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया। ना नेता पहुंचा, ना मंत्री आया—तो ग्रामीणों ने अपना ज्ञापन एक कुत्ते को ही सौंप दिया।
मामला ग्राम पंचायत कुर्रा के वार्ड क्रमांक-04 का है, जहां ग्रामीण लंबे समय से सीसी रोड और अंडरग्राउंड नाली निर्माण की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क और जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से बारिश के दिनों में पूरा रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ती है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक न तो निर्माण कार्य की स्वीकृति मिली और न ही समस्या का स्थायी समाधान हुआ। लगातार अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने पोस्टर लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
विरोध के पोस्टर पर लिखा था— “अब और नहीं चलेगा झूठ का वादा… शिक्षा भी चाहिए, सड़क भी चाहिए… ना नेता आया, ना मंत्री आया, फिर भी ग्रामीणों ने कुत्ते को सौंपा अपना ज्ञापन!”
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और गांव के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। बारिश में कीचड़ और जलभराव के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने अब प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो 02 अक्टूबर 2026 को शांतिपूर्ण एवं अहिंसक तरीके से भूख हड़ताल/अनशन शुरू किया जाएगा। इसकी पूर्व सूचना सरपंच और सचिव, ग्राम पंचायत कुर्रा को लिखित रूप से दिए जाने की बात ग्रामीणों ने कही है।
अब सवाल यह है कि जब ग्रामीणों की बार-बार की गुहार और आवेदन के बाद भी सड़क और नाली जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें कुत्ते को ज्ञापन सौंपने तक की नौबत आ गई, तो जिम्मेदार आखिर कब जागेंगे?
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि उन्हें आश्वासन नहीं, जमीन पर काम चाहिए—पक्की सड़क चाहिए, नाली चाहिए और बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ता चाहिए।
