विधायक मंडावी ने वन मंत्री केदार कश्यप के इस्तीफे की मांग की
बीजापुर। वन मंत्री केदार कश्यप की पत्नी की कंपनी को रायपुर में जमीन आवंटन के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। विधायक विक्रम मंडावी ने इस मामले में सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। मंडावी ने आरोप लगाया कि मंत्री की पत्नी की कंपनी को कचना-नालापारा की जमीन के बदले सड्डू में करीब 20 करोड़ रुपए कीमत का भूखंड दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है।
मंडावी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड के पास कचना-नालापारा में करीब 1.33 एकड़ जमीन है। मंडावी के अनुसार इसके बदले रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की ओर से सड्डू में एमआर-43 के पास करीब 2,168 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर 25 आवंटित किए जाने की प्रक्रिया का मामला सामने आया है। विधायक ने प्रस्तावित जमीन की अनुमानित कीमत करीब 20 करोड़ रुपए बताई है।
मंत्री की पत्नी कंपनी में निदेशक होने का दावा
विधायक मंडावी ने कहा कि मंत्री केदार कश्यप की पत्नी कंपनी में निदेशक बताई गई हैं। उन्होंने जमीन आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरडीए इसे नियमों के अनुसार बता रहा है, लेकिन इस मामले में पारदर्शिता के लिए पूरे दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
बस्तर के मुद्दे से जोड़ा मामला
मंडावी ने कहा कि बस्तर में आदिवासी अपनी पैतृक जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वन भूमि, निस्तार और ग्रामसभा की सहमति जैसे मुद्दों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे समय में मंत्री के परिवार से जुड़ी कंपनी को राजधानी में करोड़ों रुपए मूल्य की जमीन आवंटन का मामला सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि “एक तरफ बस्तर का आदिवासी अपनी जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहा है, दूसरी तरफ मंत्री परिवार से जुड़ी कंपनी के लिए करोड़ों की जमीन का मामला सामने आ रहा है।”
17 साल 9 महीने के कार्यकाल पर निशाना
विधायक ने मंत्री के लंबे राजनीतिक कार्यकाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 17 साल 9 महीने के राजनीतिक सफर और मंत्री पद पर रहते हुए बस्तर के विकास के दावे किए गए, लेकिन जमीन आवंटन का यह मामला सत्ता के दोहरे चरित्र को सामने लाता है।
मंडावी ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच, आवंटन प्रक्रिया की समीक्षा और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने वन मंत्री केदार कश्यप के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
आरडीए का पक्ष भी अहम
विधायक के आरोपों के अनुसार आरडीए की ओर से जमीन आवंटन की प्रक्रिया को नियमसम्मत बताया जा रहा है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए आरडीए और संबंधित कंपनी का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
