मूक पत्रिका छत्तीसगढ़ – राजधानी रायपुर के वीर शिवाजी वार्ड (खमतराई) में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के उपयोग पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस सड़क किनारे महज चार महीने पहले लाखों रुपये खर्च कर आकर्षक पेवर ब्लॉक लगाए गए थे, आज वही पेवर ब्लॉक गैस पाइपलाइन की खुदाई की भेंट चढ़ चुके हैं। विकास की तस्वीर दिखाने के लिए बनाए गए फुटपाथ अब मलबे के ढेर में तब्दील हो गए हैं और स्थानीय लोग इसे जनता के टैक्स के पैसों की खुली बर्बादी बता रहे हैं।
वार्ड के मुख्य मार्ग पर कुछ महीने पहले नगर निगम द्वारा पेवर ब्लॉक बिछाकर क्षेत्र को सुंदर और व्यवस्थित बनाने का दावा किया गया था। स्थानीय लोगों ने भी उम्मीद जताई थी कि अब उन्हें बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए शुरू हुई खुदाई ने पूरे निर्माण कार्य को तहस-नहस कर दिया। आज हालात ऐसे हैं कि जहां कभी व्यवस्थित फुटपाथ था, वहां चारों तरफ उखड़े हुए पेवर ब्लॉक, मिट्टी, गड्ढे और मलबा नजर आता है।

घटनास्थल पर लगे “PNGRB – PNG Gas Pipeline Work In Progress” के बोर्ड यह साफ बताते हैं कि गैस पाइपलाइन का कार्य चल रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि इसी मार्ग पर कुछ ही महीनों बाद पाइपलाइन डालनी थी, तो आखिर लाखों रुपये खर्च कर पेवर ब्लॉक लगाने की इतनी जल्दबाजी क्यों की गई? क्या नगर निगम और संबंधित विभागों के बीच किसी प्रकार का समन्वय नहीं था? या फिर सरकारी धन खर्च करना ही उद्देश्य था?
सबसे अधिक परेशानी स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों को उठानी पड़ रही है। दुकानों के सामने खुदाई के कारण ग्राहकों का पहुंचना मुश्किल हो गया है। कई व्यापारियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। सड़क किनारे फैली मिट्टी और मलबे के कारण ग्राहक दुकान तक आने से भी बच रहे हैं। वहीं सड़क पर अव्यवस्थित ढंग से खड़े वाहन और खुदाई के कारण बची संकरी जगह दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा रही है।
बारिश के दौरान स्थिति और भी भयावह हो जाती है। खुदाई के बाद निकाली गई मिट्टी सड़क किनारे ही छोड़ दी गई है, जो बारिश में कीचड़ और दलदल में बदल जाती है। पैदल चलने वाले लोग फिसलने के डर से सड़क के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक परेशान हैं। कई स्थानों पर लोगों को गड्ढों से बचते हुए जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है।
तस्वीरों में यह भी साफ दिखाई देता है कि जिन पेवर ब्लॉक्स पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, वे अब सड़क किनारे बिखरे पड़े हैं। कुछ स्थानों पर इन्हीं पेवर ब्लॉक्स का इस्तेमाल बल्लियों को सहारा देने के लिए किया जा रहा है। यह दृश्य सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और योजना निर्माण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि गैस पाइपलाइन का कार्य पहले से प्रस्तावित था, तो संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर पहले पाइपलाइन का काम पूरा कराया जाना चाहिए था। उसके बाद सड़क और फुटपाथ का निर्माण होता तो जनता के पैसे की यह बर्बादी नहीं होती। लेकिन यहां उल्टा हुआ—पहले निर्माण कराया गया और कुछ ही महीनों बाद उसी निर्माण को तोड़ दिया गया।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि विकास कार्यों में योजना की कमी और विभागों के बीच तालमेल का अभाव लगातार सामने आ रहा है। पहले सड़क बनाई जाती है, फिर पाइपलाइन के लिए तोड़ी जाती है, उसके बाद किसी अन्य एजेंसी द्वारा फिर खुदाई कर दी जाती है। आखिर इस अव्यवस्था का खामियाजा हमेशा आम जनता ही क्यों भुगते?
लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि लाखों रुपये की लागत से हुए इस निर्माण कार्य की जिम्मेदारी कौन तय करेगा? यदि सरकारी धन की इस तरह बर्बादी होती रही तो विकास योजनाओं पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा? नागरिकों का कहना है कि टैक्स का पैसा जनता की सुविधा के लिए होता है, न कि बिना योजना के कार्य कर उसे बर्बाद करने के लिए।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम प्रशासन, गैस पाइपलाइन निर्माण एजेंसी और संबंधित विभागों से मांग की है कि खुदाई के बाद मार्ग को तत्काल पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए। सड़क किनारे फैले मलबे को हटाया जाए, उखड़े हुए पेवर ब्लॉक्स को दोबारा व्यवस्थित तरीके से लगाया जाए और पूरे मार्ग को सुरक्षित बनाया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।
वीर शिवाजी वार्ड के नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि विकास के नाम पर जनता के पैसों की बर्बादी अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर निगम और संबंधित विभाग इस मामले में जवाबदेही तय करते हैं या यह मामला भी अन्य सरकारी लापरवाहियों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
